राजधानी के अस्पतालों में बिस्तरों की कमी को 16 दिन हो चुके हैं, लेकिन हालात में अब तक कोई सुधार नहीं है। स्थिति यह है कि हर एक घर में ऑक्सीजन की परेशानी से ग्रस्त मरीज भर्ती होने के लिए पूरे परिवार के साथ अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। बावजूद, वह भर्ती नहीं हो पा रहा है। हालांकि, 14 अप्रैल को ‘अमर उजाला’ ने सबसे पहले सरकार को आगाह किया था कि अस्पतालों में बिस्तरों का अभाव तेजी से बढ़ने लगा है।
इस संकट से बाहर आने के लिए सरकार ने छतरपुर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल, बुराड़ी स्थित संत निरंकारी मिशन, यमुना क्रीड़ा स्थल, अक्षरधाम स्थित कोविड सेंटर बनाने का फैसला लिया था। बुधवार को जब स्थिति देखी गई तो हकीकत चौंकाने वाली सामने आई। वहीं, 13 अप्रैल के बाद से सरकार जिन बिस्तरों का हवाला देकर स्थिति में सुधार लाने का दावा कर रही थी वह संकट अभी भी है। 17 अप्रैल से दिल्ली में ऑक्सीजन का भी टोटा है। यह कब तक रहेगा, कहना मुश्किल है। केंद्र से लेकर दिल्ली सरकार के मंत्री इन सुविधाओं का हवाला देकर कोरोना महामारी से लड़ने का दम भर रहे थे, लेकिन पड़ताल में पता चला कि कई जगह केंद्र स्टाफ के अभाव में खाली हैं, जबकि अस्पतालों में बेड बढ़ाने के बजाय कम कर दिए हैं। जीटीबी सहित कई अस्पतालों में 50 फीसदी तक कटौती की गई है।
सरदार वल्लभ भाई पटेल कोविड सेंटर
छतरपुर के भाटी माइंस स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल कोविड सेंटर को लेकर अब तक केंद्र और राज्य सरकार काफी प्रचार कर चुकी है। 500 बिस्तरों के साथ इसे शुरू किया गया था, लेकिन पहले दिन केवल 100 बिस्तरों पर ही मरीज भर्ती किए गए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा था कि एक सप्ताह बाद यहां एक हजार और फिर दो हजार बेड शुरू हो जाएंगे। तीन दिन बाद बुधवार की स्थिति यह है कि यहां 500 में से केवल 228 बेड पर मरीज भर्ती हैं और 11 लोगों की मौत हो चुकी है। तीन मरीजों को यहां से रेफर कर दिया और नौ को छुट्टी दे दी गई। आईटीबीपी के अनुसार, यहां ऑक्सीजन की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के चलते सभी बेड शुरू नहीं किए जा सके हैं।
संत निरंकारी मिशन, बुराड़ी
बीते सप्ताह शनिवार को संत निरंकारी मिशन ने बुराड़ी स्थित मैदान पर एक हजार बेड का कोविड सेंटर बनाया गया और दिल्ली सरकार के हवाले कर दिया, लेकिन पांच दिन बाद भी यहां खाली बिस्तर ही दिखाई दे रहे हैं। पूछताछ में पता चला कि ऑक्सीजन की व्यवस्था सरकार ने नहीं की है। स्टाफ भी अब तक तैनात नहीं किया है। यानी, यह सेंटर बनने के बाद भी दिल्लीवालों को कोई लाभ नहीं।
अक्षरधाम कोविड सेंटर
यहां 500 बिस्तरों की क्षमता है, लेकिन जिन मरीजों का ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे है और एचआर सीटी स्कोर 15 या उससे अधिक है, उन्हें यहां भर्ती नहीं किया जा रहा है। क्योंकि, आईसीयू बेड की दिक्कत है। अन्य अस्पतालों से मिले आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में इस समय 4673 आईसीयू बेड हैं और सभी भरे हैं। इससे पता चल रहा है कि दिल्ली के मरीजों के लिए आईसीयू कितना जरूरी है।
रेलवे कोच की हकीकत
शकूरपुर बस्ती रेलवे स्टेशन पर 25 और आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर 50 रेलवे कोच की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन आनंद विहार में अब तक एक भी कोच शुरू नहीं हुआ है। शकूरपुर बस्ती रेलवे स्टेशन पर कोच हैं, लेकिन वहां केवल महावीर अस्पताल से रेफर केस लिए जा रहे हैं। यहां भी आईसीयू नहीं है। यहां 90 तक ऑक्सीजन लेवल वालों को ही भर्ती किया जा सकता है।
यमुना क्रीड़ा स्थल, कड़कड़डूमा
यहां 880 में से 200 ऑक्सीजन के बेड हैं, जो दो सप्ताह से लगातार भरे हुए हैं। यहां भी कम ऑक्सीजन वाले मरीजों को भर्ती नहीं किया जा सकता है। यहां से मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
आंकड़ों में हिसाब---
- दिल्ली में कुल वेंटिलेटर 1669, खाली एक भी नहीं
- कुल आईसीयू 4796, खाली एक भी नहीं
- नॉन कोविड आईसीयू बेड 1133, खाली केवल 294
- कुल बेड 21000, खाली 1636