प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट के बीच कर्तव्य पथ देश को समर्पित किया। मोदी ने कहा कि बदलाव केवल प्रतीकों तक ही सीमित नहीं है, ये बदलाव देश की नीतियों का भी हिस्सा बन चुका है। आज देश अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे सैकड़ों कानूनों को बदला चुका है। भारतीय बजट, जो इतने दशकों से ब्रिटिश संसद के समय का अनुसरण कर रहा था, उसका समय और तारीख भी बदली गई है।
पीएम ने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिये अब विदेशी भाषा की मजबूरी से भी देश के युवाओं को आजाद किया जा रहा है। यानी, आज देश का विचार और देश का व्यवहार दोनों गुलामी की मानसिकता से मुक्त हो रहे हैं। ये मुक्ति हमें विकसित भारत के लक्ष्य तक लेकर जाएगी। पीएम मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा, कर्तव्य पथ केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता भर नहीं है। ये भारत के लोकतान्त्रिक अतीत और सर्वकालिक आदर्शों का जीवंत मार्ग है। यहां जब देश के लोग आएंगे, तो नेताजी की प्रतिमा, नेशनल वार मेमोरियल, सब उन्हें कितनी बड़ी प्रेरणा देंगे, उन्हें कर्तव्यबोध से ओत-प्रोत करेंगे!
राष्ट्र ही प्रथम की भावना जागेगी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, अगर पथ ही राजपथ हो, तो यात्रा लोकमुखी कैसे होगी? राजपथ ब्रिटिश राज के लिए था, जिनके लिए भारत के लोग गुलाम थे। राजपथ की भावना भी गुलामी का प्रतीक थी, उसकी संरचना भी गुलामी का प्रतीक थी। पीएम मोदी ने कहा, आज इसका आर्किटेक्चर भी बदला है, और उसकी आत्मा भी बदली है। अब देश के सांसद, मंत्री, अधिकारी जब इस पथ से गुजरेंगे तो उन्हें कर्तव्यपथ से देश के प्रति कर्तव्यों का बोध होगा। नेशनल वॉर मेमोरियल से लेकर कर्तव्यपथ से होते हुए राष्ट्रपति भवन का ये पूरा क्षेत्र उनमें नेशन फर्स्ट, राष्ट्र ही प्रथम, इस भावना का प्रवाह प्रति पल संचारित होगा।