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किसान आंदोलन: दिल्ली की सीमाओं पर किलेबंदी, पैदल पहुंचना भी मुश्किल

Sat, 06 Feb 2021 04:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली    
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सिंघु बॉर्डर पर की गई तैयारी... - फोटो : अमर उजाला
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सिंघु, टीकरी व गाजीपुर बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने किलांबदी मजबूत कर दी है। आज के चक्का जाम से सतर्क दिल्ली पुलिस ने हाइवे के साथ घुमावदार रास्तों पर भी पहरा लगा रखा है। बैरीकेडिंग व कंटीले तारों के साथ बड़ी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों की निगाह से बच निकलना संभव नहीं है। भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच अमर उजाला संवाददाता सर्वेश कुमार, आदित्य पांडेय व किशन कुमार ने दिल्ली की तरफ से मंच तक पहुंचने की कोशिश की। पेश है लाइव रिपोर्ट....

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सिंघु बॉर्डर: मुख्य रास्तों पर पुलिस का पहरा, गांव की गलियां बनी सहारा

सिंघु बॉर्डर पर पिछले 72 दिनों से प्रदर्शन कर रहे किसानों के आंदोलन स्थल तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। कभी पगडंडियों पर धूप छांव तो बैरिकेट से प्रवेश न मिलने पर पूरे दिन हजारों लोग गांव की ओर रुख कर पैदल चलते नजर आए। चक्का जाम को देखते हुए शुक्रवार सुबह से ही आंदोलन स्थल पर आने जाने वालों को हाईवे पर लगे बैरिकेड्स से प्रवेश करने की इजाजत नहीं मिली।

बस स्टॉप से करीब पौने दो किलोमीटर की दूरी पर सिंघु गांव के मोड़ पर लगे बैरिकेड्स से किसी भी व्यक्ति को प्रवेश की सुरक्षा कर्मियों ने इजाजत नहीं दी। नतीजतन, लोगों ने गांव की ओर रुख किया, फिर कुंडली बॉर्डर पर पहुंचने के लिए ढाई किलोमीटर की दूरी पैदल या अधिक खर्च कर ई रिक्शा या ऑटो से पहुंचने का मौका मिला।
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बस, ऑटो या टैक्सी को सिंघोला तक ही जाने की इजाजत है। वहां से करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने के बाद हाइवे पर लगे बैरिकेट्स पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के अलावा किसी को भी प्रवेश कीइजाजत नहीं दी जा रही थी। संवाददाता ने आईडी कार्ड दिखाया तो जवाब मिला, आगे जाने की इजाजत नहीं है। सिंघु गांव के रास्ते जा सकते हैं।

बैरिकेड्स के किनारे पैदल निकलने की जगह, वहां से कुंडली की तरफ जाने के लिए ई रिक्शा और कुछ टैम्पो जरूर थे। मगर किराया 30 से 50 रुपये और सोनीपत के बहालगढ़ के लिए सौ रुपये किराया वसूला जा रहा था। गांव के अंदर करीब ढाई किलोमीटर पैदल चलने के बाद, फोर्ड शोरूम के पास आंदोलन स्थल पर पहुंचे। इस बीच गांव में एमसीडी टोल बैरियर भी था, लेकिन खुला। चक्का जाम के लिए आगे  सुरक्षा कर्मियों की तैनाती थी तो सुरक्षा लेयर को और सख्त बनाने की तैयारी दिखी।

कुंडली में पहुंचने पर एक  दुकानदार सरयू तिवारी ने बताया कि यहां पर आने जाने वालों की संख्या काफी कम हो गई है। बैरिकेड्स गांव के बाहर भी लगा दिए गए हैं और फैक्ट्रियों में भी काम करने वाले श्रमिकों की या तो छुट्टी कर दी गई है या नहीं पहुंच पा रहे हैं। सिंघु बॉर्डर की तरफ पैदल चलते हुए बैरिकेड से पहले करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद दिल्ली की तरफ प्रवेश की इजाजत नहीं थी। बैरिकेड्स लगे होने के साथ साथ किसी को आगे जाने की इजाजत भी नहीं दी जा रही थी।

सिंघु से कुंडली की तरफ दिल्ली की तरफ हाइवे पर पहुंचने के लिए गंदे नाले के साथ साथ करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलने के बाद हाइवे पर किसी तरह पहुंचने का मौका मिला। सुरक्षा के लिहाज से गांव के चारों तरफ के अधिकतर रास्तों में बाधाएं थी, नतीजतन वहां पहुंचना ही एक बड़ी चुनौती है। 

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गाजीपुर बॉर्डर: दस मिनट का सफर डेढ़ घंटे में हुआ पूरा

गाजीपुर मुर्गा मंडी फ्लाईओवर से पहले बैरीकेडिंग पर पुलिस ने आगे जाने से मना कर दिया। देर तक चली गुजारिश के बाद भी आगे जाने की इजाजत नहीं मिली। नतीजन दूसरा रास्ता ढूढ़ने की कोशिश शुरू हुई। इधर-उधर घूमने के बाद सीएनजी पंप के पीछे की पगडंडी का रास्ता खुला दिखा। धूल भरे इस रास्ते पर चलना आसान नहीं था। फिर भी, मंच तक पहुंचने के लिए इसके सिवा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था। थोड़ी दूर चलने पर करीब चार फिट गहरा गड्ढा मिला। इसे जेसीबी मशीन से पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए खोद रखा था। साथ ही इसके बगल ऊंची दीवार भी थी। गहरे गड्ढे को पार करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। किसी तरह आगे बढ़ना संभव हो सका।

करीब तीन किमी चलने के बाद तीसरी बड़ी बाधा सामने थे। पुलिस ने पगडंडी को कौशांबी जाने वाली सड़क के मर्जिंग प्वाइंट को कंटीले तारों से ढंक दिया गया है। एक बारगी लगा कि अब आगे बढ़ना संभव नहीं होगा, लेकिन नजदीक जाने पर कंटीले तारों के बीच से संकरा गलियारा किसानों से बना रखा था। तारों से बचने के लिए इस पर मिट्टी डाल दी गई थी। इससे आगे निकलने के बाद भी मंच अभी करीब 500 मीटर दूर था। हालांकि, सामने किसान बैठे थे, जिनके वालेंटियर की लंबी तफ्तीश भी चलती रही। मुख्य मार्ग से बमुश्किल दस मिनट में तय होने वाले सफर को पूरा करने में डेढ़ घंटे से ज्यादा का समय जाया हुआ। इस बीच करीब तीन किमी का चक्कर भी लगाना पड़ा।

 
टीकरी बॉर्डर: जद्दोजहद के बाद पार कर पाए 6 मोड़ और 8 बैरीकेडिंग
टीकरी बॉर्डर मेट्रो स्टेशन बेशक पुलिस की पहली बैरीकेडिंग से बमुश्किल 400 मीटर दूर है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए लंबी पूछताछ से गुजरना पड़ा। पहली बैरीकेडिंग से 50 मीटर दूर ही दूसरी बैरीकेडिंग लगी है। पुलिस ने काफी देर तक चली पूछताछ व हीलाहवाली के बाद अंदर जान की इजाजत दी। बैरीकेडिंग से आगे एमसीडी टोल पर किसानों को दिल्ली की तरफ कूच करने से रोकने के लिए लोहे की कील, सरिया सीमेंट में जमी मिली। इसके आगे सीमेंट के पत्थरों के बीच मिट्टी और कंकरीट भरकर एक और मजबूत बैरीकेडिंग थी। हर प्वाइंट पर जवानों को भारी-भरकम तैनाती थी। इसके बाद दो लेयर लोहे की बैरीकेडिंग थी। करीब एक किमी लंबे रास्तों पर बार-बार पुलिस की पूछताछ से गुजरना पड़ा।

इसके बाद की सड़क पर किसान आंदोलनकारी जमे दिखे। उन्होंने अपने स्तर पर दो लेयर की बैरीकेडिंग कर रखी है। इस तरफ से धरना स्थल पर जाने का रास्ता नहीं था। यहां की बंदी से बचने के लिए 200 मीटर लौटकर दाई तरफ की गली का सहारा लेना पड़ा। धर्म पार्क को जाने वाली इस गली से करीब 500 मीटर आगे बढ़ने पर स्थानीय निवासियों की भीड़ दिखी। धरना स्थल की वजह से छोटी-छोटी दुकानें यहां  शिफ्ट होने से लोग खरीददारी कर रहे थे। भीड़भाड़ वाले इस संकरे रास्ते से तीन मोड़ आगे धरना स्थल था। पांच मिनट में तय होने रास्ता पूरा करने में 40 मिनट से ज्यादा का समय लग गया। टिकरी बॉर्डर मेट्रो स्टेशन उतरकर धरना स्थल जाने के लिये छह मोड और आठ बैरीकेडिंग को पार करना पड़ा।
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