सिंघु, टीकरी व गाजीपुर बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस ने किलांबदी मजबूत कर दी है। आज के चक्का जाम से सतर्क दिल्ली पुलिस ने हाइवे के साथ घुमावदार रास्तों पर भी पहरा लगा रखा है। बैरीकेडिंग व कंटीले तारों के साथ बड़ी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों की निगाह से बच निकलना संभव नहीं है। भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच अमर उजाला संवाददाता सर्वेश कुमार, आदित्य पांडेय व किशन कुमार ने दिल्ली की तरफ से मंच तक पहुंचने की कोशिश की। पेश है लाइव रिपोर्ट....
सिंघु बॉर्डर: मुख्य रास्तों पर पुलिस का पहरा, गांव की गलियां बनी सहारा
सिंघु बॉर्डर पर पिछले 72 दिनों से प्रदर्शन कर रहे किसानों के आंदोलन स्थल तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। कभी पगडंडियों पर धूप छांव तो बैरिकेट से प्रवेश न मिलने पर पूरे दिन हजारों लोग गांव की ओर रुख कर पैदल चलते नजर आए। चक्का जाम को देखते हुए शुक्रवार सुबह से ही आंदोलन स्थल पर आने जाने वालों को हाईवे पर लगे बैरिकेड्स से प्रवेश करने की इजाजत नहीं मिली।
बस स्टॉप से करीब पौने दो किलोमीटर की दूरी पर सिंघु गांव के मोड़ पर लगे बैरिकेड्स से किसी भी व्यक्ति को प्रवेश की सुरक्षा कर्मियों ने इजाजत नहीं दी। नतीजतन, लोगों ने गांव की ओर रुख किया, फिर कुंडली बॉर्डर पर पहुंचने के लिए ढाई किलोमीटर की दूरी पैदल या अधिक खर्च कर ई रिक्शा या ऑटो से पहुंचने का मौका मिला।
बस, ऑटो या टैक्सी को सिंघोला तक ही जाने की इजाजत है। वहां से करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने के बाद हाइवे पर लगे बैरिकेट्स पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के अलावा किसी को भी प्रवेश कीइजाजत नहीं दी जा रही थी। संवाददाता ने आईडी कार्ड दिखाया तो जवाब मिला, आगे जाने की इजाजत नहीं है। सिंघु गांव के रास्ते जा सकते हैं।
बैरिकेड्स के किनारे पैदल निकलने की जगह, वहां से कुंडली की तरफ जाने के लिए ई रिक्शा और कुछ टैम्पो जरूर थे। मगर किराया 30 से 50 रुपये और सोनीपत के बहालगढ़ के लिए सौ रुपये किराया वसूला जा रहा था। गांव के अंदर करीब ढाई किलोमीटर पैदल चलने के बाद, फोर्ड शोरूम के पास आंदोलन स्थल पर पहुंचे। इस बीच गांव में एमसीडी टोल बैरियर भी था, लेकिन खुला। चक्का जाम के लिए आगे सुरक्षा कर्मियों की तैनाती थी तो सुरक्षा लेयर को और सख्त बनाने की तैयारी दिखी।
कुंडली में पहुंचने पर एक दुकानदार सरयू तिवारी ने बताया कि यहां पर आने जाने वालों की संख्या काफी कम हो गई है। बैरिकेड्स गांव के बाहर भी लगा दिए गए हैं और फैक्ट्रियों में भी काम करने वाले श्रमिकों की या तो छुट्टी कर दी गई है या नहीं पहुंच पा रहे हैं। सिंघु बॉर्डर की तरफ पैदल चलते हुए बैरिकेड से पहले करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद दिल्ली की तरफ प्रवेश की इजाजत नहीं थी। बैरिकेड्स लगे होने के साथ साथ किसी को आगे जाने की इजाजत भी नहीं दी जा रही थी।
सिंघु से कुंडली की तरफ दिल्ली की तरफ हाइवे पर पहुंचने के लिए गंदे नाले के साथ साथ करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलने के बाद हाइवे पर किसी तरह पहुंचने का मौका मिला। सुरक्षा के लिहाज से गांव के चारों तरफ के अधिकतर रास्तों में बाधाएं थी, नतीजतन वहां पहुंचना ही एक बड़ी चुनौती है।