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#LadengeCoronaSe : कोरोना से जंग में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं डॉक्टरों की पत्नियां

Mon, 03 May 2021 04:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा नवनीत शरण, नई दिल्ली

सार

  • डॉ. पति के सहयोग से घर से ही प्राथमिक चिकित्सा दे रही है महिलाएं
  • कोविड वारियर्स डॉक्टर की पत्नियों के जज्बे को भी सलाम
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पत्नी प्रीति के साथ डॉ. धीरज और बेटी आनंदी... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कोरोना महामारी में कोविड मरीजों को राहत देने में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। सहानुभूति और ढांढस तो बढ़ा ही रही हैं साथ ही मददगार भी साबित हो रही हैं। इनमें खासकर डॉक्टर की पत्नियां इन दिनों घर से ही डॉक्टर पति की सलाह लेकर ऑक्सीजन, दवा, जांच में सहायक बनी हुई है। ऐसा इसलिए भी है कि जिस समाज, सोसायटी, मुहल्ले में रहती हैं वहां उनका घरेलू संपर्क भी होता है और लोगों की उम्मीद भी। 

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डॉक्टर पति अस्पताल में मरीजों को संभाल रहे तो पत्नी सोसायटी में
घर से ही डॉक्टरों की पत्नियां प्राथमिक चिकित्सालय चला रही हैं। किसी को आक्सीजन उपलब्ध करा रही हैं तो किसी को डॉक्टरी सलाह। डॉक्टर पति की व्यवस्तता को देखत हुए कोविड मरीजों से खुद बात कर एक नर्स की भूमिका निभा रही हैं और डॉक्टर पति के घर पहुंचने या फोन पर बात करते वक्त कोविड मरीजों की परेशानियों से अवगत करा कर उनके लिए दवा का पुर्जा खुद तैयार कर रही हैं। 

कोरोना वॉरियर्स की भूमिका में है
डॉक्टर की पत्नियां भी कोराना वारियर्स से कम नहीं हैं। महामारी के दौर में डॉक्टर पति से उनकी सिर्फ यही मांग है कि कोविड से जंग में जीत कर वापस आएं। सैपल में मिली जितनी भी दवाइयां हैं वे वितरित करने में पीछे नहीं हैं तो जांच केंद्रों पर फोन कर लोगों की मदद दे रही हैं। 
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डाक्टर की पत्नी होने के नाते लोगों की उम्मीद इनदिनों ज्यादा बढ़ गई है। सुबह से रात तक कोई अपने पति के लिए कॉल करता है तो कोई अपने बच्चे के लिए। ऐसे में एक महिला का दिल तब रो पड़ता है जब कोई अपने पति या बच्चे की बीमारी के लिए मदद मांगता है। कोविड में तो किसी के जीवन को बचाना एक कर्तव्य बन गया है।

आधी रात में भी जब किसी का फोन आता है तो उसके घर ऑक्सीजन की सुविधा देनी हो या दवाईया या ऑक्सीमीटर से उस मरीज का ऑक्सीजन लेवल नापना। इसके लिए सदैव तैयार रहना पड़ता है। ऐसा इसलिए भी है कि जिस जगह रहते है वहां लोगों की उम्मीद डॉक्टरों से बन जाती है। पति पर कई बार दबाव बना कर हॉस्पीटल में एडमिट कराना या वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध कराने में भी मददगार बनना पड़ता है। फोन पर ही डॉ. धीरज केबताए अनुसार प्राथमिकी चिकित्सा दे रही हूं।
डॉ. धीरज सिंह की पत्नी प्रीति सिंह

बेटा दूर से ही डैडी को देखकर प्यार करता है
कोरोना योद्धा इनदिनों घर तो पहुंचते है, लेकिन अपने बच्चे तक को गले नहीं लगा पाते। बेटा दूर से ही डैडी को देखकर प्यार करता है।  कोविड अस्पताल में मरीजों के बीच रहकर जब पति घर आते है तो आइसोलेट हो जाते है। बेटा अनादि भी दूर से ही पति को प्यार करता है। आजमगढ़ स्थित पुष्पनगर के मूल निवासी डॉ. धीरज की पत्नी कहती है कि दिल्ली में बढ़ते संक्रमण को देखकर ऐसा लगता है जैसे अपनी कोई दुनियां ही नहीं है। हालांकि कहती है कि मौत एक अटल सत्य है, जिंदगी एक सुंदर स्वप्न कोरोना आया है और जल्द चला जाएगा, आत्मविश्वास ही जीत दिलाएगा।

कई कोविड मरीजों में कंजेक्टीवाइटिस के भी लक्ष्ण देखे जा रहे है। आर्मी अस्पताल के अलावा अपने आस-पास के लोगों को भी उपचार दे रही हूं। जहां जाना संभव नहीं हो पाता है वहां ऑनलाइन मरीजों को उपचार बताने की कोशिश करती हूं। इनदिनों उस वक्त सबसे अजीब महसूस होता है जब बेटा अर्जुन समीप आकर गोद में बैठना चाहता है।  
डॉक्टर शिखा, आर्मी हॉस्पीटल में कार्यरत

कहा जाता है कि हर सफल व्यक्ति के पीछे महिला का हाथ होता है। डॉक्टर अगर कोरोना योद्धा की भूमिका में है तो इसके पीछे भी पत्नी का योगदान है। घर की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही बाहर की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही है।
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डॉ. धीरज सिंह व डॉ. अखिल 

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