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घटना के दो माह बाद पुलिसकर्मी को चश्मदीद गवाह बनाने पर अदालत ने उठाए सवाल

Wed, 17 Mar 2021 05:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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हाईकोर्ट ने दिल्ली हिंसा से जुड़े एक मामले में घटना के दो माह बाद पुलिसकर्मी को चश्मदीद गवाह बनाने पर जांच पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि चश्मदीद गवाह पुलिसकर्मी है और कानून के जानकार द्वारा दो माह तक चुप रहने का रवैया हैरानी भरा है। अदालत ने मामले में पुलिस की जांच पर संदेह जताते हुए चार आरोपियों को जमानत प्रदान करते हुए उक्त टिप्पणी की।'

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न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने जमानत पर सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा जमानत का विरोध करने पर जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा यह हैरानी की बात है कि जांच अधिकारी ने दो माह बाद उस पुलिसकर्मी को चश्मदीद गवाह बनाया है जो स्वयं कानून का जानकार है। 

उन्होंने कहा यह समझ से परे है कि कानून की समझ होने के बाद भी घटना के चश्मदीद पुलिसकर्मी ने न तो पीसीआर को फोन किया और न ही इसके बारे में थाने में डीडी एंट्री की। इसके अलावा मामले के तीन अन्य चश्मदीद गवाहों के बयान भी 15 दिन बाद दर्ज किए गए और इन गवाहों ने भी पीसीआर कॉल नहीं की। 
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अदालत ने बचाव पक्ष के तर्क स्वीकार करते हुए कहा कि इन आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य के तौर पर दिल्ली पुलिस के पास न तो सीसीटीवी फुटेज है और न ही कोई वीडियो क्लिप या तस्वीर है जिससे घटना से इनके संबंध को जोड़ा जा सके। अदालत ने कहा कि मामले में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, ऐसे में आरोपियों को लंबे समय तक जेल में बंद रखने का कोई औचित्य नहीं है। 

अदालत ने आरोपी लियाकत अली, अरशद, गुलफाम और इरशाद अहमद की जमानत 20-20 हजार रुपये के मुचलके व एक-एक अन्य जमानत राशि पर मंजूर की है। उन्होंने आरोपियों को निर्देश दिया कि वे किसी तरह से मामले के गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित नहीं करेंगे।

हिंसा के दौरान 24 फरवरी, 2020 को हिंसा, लूटपाट, डकैती, वाहनों को जलाने सहित विभिन्न आरोपों में इन आरोपियों को खजूरीखास थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था। घटना के तीन दिन बाद पुलिस ने 27 फरवरी को मुकदमा दर्ज किया था और 14 मार्च 2020 को तीन चश्मदीदों के बयान दर्ज किए थे। एक पुलिसकर्मी का बयान 24 अप्रैल, 2020 को दर्ज किया गया था। 

दिल्ली पुलिस ने आरोपियों को मामले में मुख्य साजिशकर्ता एवं निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन का करीबी बताया था। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई जबकि 200 से अधिक घायल हो गए थे। 

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