सेहतमंद रहने और पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षित साइकिल की रफ्तार पर भी कोरोना ने ब्रेक लगाया है। हालात सुधरने के बाद अनलॉक के दौरान पहियों ने दोबारा रफ्तार पकड़ी, मगर अभी भी जरूरी काम के सिलसिले में मेट्रो स्टेशन, प्रमुख स्थानों पर किराये की साइकिल की मांग सिमटकर 10 फीसदी से भी कम हो गई है। कॉलेज शिक्षण संस्थानों के बंद होने और दफ्तरों में कम क्षमता के साथ काम करने की इजाजत होने की वजह से भी लोग संक्रमण से बचने के लिए निजी वाहनों का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सेहत के लिहाज से भी साइक्लिंग के कई फायदे हैं। मास्क लगाकर साइक्लिंग की जाए तो कैलोरी बर्न होने के साथ साथ फेफड़े भी मजबूत होते हैं। इससे संक्रमण से लड़ने में भी काफी मदद मिल सकती है।
मेट्रो स्टेशन से दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज, मंडी हाउस, पटेल चौक, मूलचंद सहित दिल्ली में 80 से अधिक प्वाइंट पर किराये की साइकिल की सुविधा मुहैया की जा रही है। मेट्रो स्टेशनों पर किराये पर साइकिल की सुविधा मुहैया करने वाली कंपनी के डायरेक्टर अतुल जैन का कहना है कि लॉकडाउन में काम बंद होने की वजह से काफी नुकसान हुआ है। संक्रमण के डर और बंदिशों की वजह से मांग 10 फीसदी से भी कम रह गई है।
विश्वविद्यालय, रोहिणी ईस्ट, जीटीबी नगर मेट्रो स्टेशन पर साइकिल सेवा प्रदाता अतुल जैन का कहना है कि लॉकडाउन में पिछले साल करीब साढ़े पांच महीने के बाद लगातार दूसरे साल लॉकडाउन में मेट्रो सेवाएं बंद होने की वजह से मेट्रो स्टेशन या दूसरी जगहों से किराये की साइकिल की मांग काफी कम हो गई। कोरोना की दूसरी लहर के बाद निजी वाहनों का इस्तेमाल बढ़ गया है।
कॉलेजों के बंद होने से कम हुई मांग
विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन के पास के दिल्ली विश्वविद्यालय के पांच कॉलेजों को सेटेलाइट स्टेशन का नाम दिया गया। मेट्रो से उतरने के बाद कॉलेजों में आने जाने के लिए रोजाना करीब 700 से अधिक छात्र-छात्राएं साइकिल के विकल्प को अपनाते थे। अब यह संख्या 50-60 रह गई है। मेट्रो से आगे रामजस, दौलतराम कॉलेज, हंसराज, किरोड़ी मल कॉलेज और श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स को सेटेलाइट स्टेशन बनाया गया। कॉलेज बंद होने की वजह से अब साइकिल की मांग भी काफी कम हो गई है।
कम खर्च में साइकिल का विकल्प अपनाने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। एक घंटे के लिए 10 रुपये और एक दिन के लिए 22 रुपये चार्ज किया जा रहा है। पैडल वाली साइकिल के लिए क्यूआर कोड स्कैन कर भी आप इस्तेमाल कर सकते हैं। एप के जरिये इस सुविधा का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी थी, लेकिन महामारी काल में इस व्यावसाय को गहरा झटका लगा है।
पार्ट्स की चोरी से भी बढ़ी परेशानी
बाराखंभा, पटेल चौक, मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन और शाहदरा सहित दिल्ली के 40 जगहों पर किराये पर साइकिल की सेवा देने वाली कंपनी के सीईओ विनोद हरयाल का कहना है कि अभी मांग न के बराबर है। अनलॉक में दोबारा शुरुआत की गई, लेकिन लॉकडाउन के दौरान साइकिल उपकरणों की चोरी से नुकसान और बढ़ गया है।
बुनियादी सुविधाओं से सुधार जरूरी
सेवा प्रदाता का कहना है कि नीदरलैंड, बेल्जियम की तर्ज पर बुनियादी सुविधाएं विकसित किए जाने की जरूरत है। साइक्लिंग सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद है और बुनियादी सुविधाएं बेेहतर होने से सफर सुरक्षित होगा। लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए साइकिल की पार्किंग के लिए शेड्स के लिए जगह मुहैैया किए जाने से साइकिल अपनाने वालों की संख्या बढ़ेगी।
साइक्लिंग से फेफड़े होंगे मजबूत, मास्क लगाना जरूरी
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजय कुमार का कहना है कि साइकिल चलाने से नई ऊर्जा मिलती है और सकारात्मकता भी बढ़ती है। कैलोरी बर्न के साथ-साथ मास्क पहनकर अगर साइक्लिंग की जाए तो फेफड़े भी अधिक मजबूत होते हैं। मास्क लगाने से प्रदूषित हवा से बचाव होता है तो फेफड़े भी सुदृढ़ होते हैं। कोरोना महामारी से पहले महानगरों में साइक्लिंग को बेहतर नहीं मानता था। मौजूदा हालात में दिल्ली में भी साइक्लिंग के कई फायदे उठाए जा सकते हैं। बुनियादी सुविधाएं अगर और बेहतर हुई तो इसके सकारात्मक परिणाम दिखने लगेंगे।