महाराष्ट्र बेशक संक्रमण के मामले में अभी भी सबसे ऊपर है, लेकिन दिल्ली में भी एक महीने में हालात बदतर हुए हैं। देश के 11 राज्यों से ज्यादा तेजी से दिल्ली में संक्रमण के सक्रिय मामले बढ़े हैं। फरवरी में 21वें स्थान पर मौजूद दिल्ली इस वक्त 10वें स्थान पर पहुंच गई है। इस बीच करीब दस गुना सक्रिय मामले बढ़ हैं। सक्रिय मरीजों का आंकड़ा 1,404 से 10,498 हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार हालात बेहद नाजुक हैं। अगर एहतियात नहीं बरती गई तो नतीजे खतरनाक हो सकते हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस समय देश में सबसे ज्यादा सक्रिय मामले महाराष्ट्र में हैं। इसके बाद कर्नाटक, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश ,छ्त्तीसगढ़ गुजरात, उत्तर प्रदेश और 10 वां दिल्ली का स्थान है। आबादी के लिहाज से देखें तो सबसे अधिक सक्रिय मामले दिल्ली में ही है। यहां एक माह में ही संक्रमण से हालात पूरी तरह बदल गए हैं। एक मार्च तक कुल सक्रिय मरीजों की संख्या 1404 थी, जो अब बढ़कर 10,498 हो गई है। लिहाजा एक माह में ही 9,094 मरीज बढ़ चुके हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो दिल्ली में सबसे अधिक सक्रिय मामले(42629) नवंबर में थे। उसके बाद से धीरे-धीरे यह संख्या कम होने लगी थी, और इस साल 20 फरवरी में घटकर 1025 रह गई थी। उस समय लग रहा था कि यह आंकड़ा एक हजार के नीचे चला जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
मार्च के पहले सप्ताह से ही कोरोना से हालात बदलने लगे। जहां फरवरी में रोजाना औसतन 120 दैनिक मामले आ रहे थे तो मार्च में यह संख्या 890 हो गई थी। संक्रमितों के बढ़ने से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या कम होने लगी। नतीजतन सक्रिय मामले भी तेजी से बढ़ने लगे।
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर बी.बी वाधवा ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले कोरोना काफी तेजी से बढ़ रहा है।
इस समय सावधानी ही इलाज है। खासकर युवाओं को अधिक सावधान रहने की जरूरत है। अगर कोरोना से बचाव नहीं किया गया तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। जरूरी है कि अधिक से अधिक लोग टीका लगवाए और कोविड से बचाव के नियमों का पालन करें।
इस तरह बढ़े सक्रिय मामले
तारीख- मामले
01 मार्च- 1,404
05 1,779
10 1,900
15 2,321
20 3,409
25 5,497
30 7,429
1 अप्रैल- 10,498
छह माह में ऐसे बदलते रहे हालात( इसका ग्राफ बना सकते हैं)
माह- सक्रिय मामले
अक्तूबर- 23,922
नवंबर-42,629
दिसंबर-8,735
जनवरी- 3,683
फरवरी-1,025
मार्च-10,498
2 अप्रैल तक---
नोट- आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं