सप्ताहांत कर्फ्यू के दौरान शनिवार को डीटीसी की अधिकतर बसें खाली दौड़ती नजर आईं। बसों के अंदर केवल 10 से 15 फीसदी लोगों ने यात्रा की। हालांकि, आम दिनों की अपेक्षा बसों की फ्रीक्वेंसी भी कम दिख रही थी। जिन लोगों के पास वैधानिक ई-पास या आई कार्ड था, उन्हें ही डीटीसी की बसों में यात्रा करने की अनुमति मिली। बाकी लोगों को सिविल डिफेंस कर्मी ने या तो बस में चढ़ने नहीं दिया या फिर उन्हें बस से बाहर उतार दिया गया।
बसों के अंदर सवार यात्रियों को मास्क लगाने के लिए निरंतर सचेत किया जा रहा था। सिविल डिफेंस के लोग कड़ाई से इस नियम का पालन कराते दिखाई दिए। कर्फ्यू के पहले दिन शनिवार को सड़कें सुनसान रही। इक्का-दुक्का छोड़कर सड़कों पर वाहन नजर नहीं आ रहे थे। सुबह के वक्त डीटीसी और क्लस्टर बसों का आवागमन ज्यादा था। मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के सामने स्थित बस स्टैंड पर आधे घंटे के बाद एक बस आई, लेकिन बस में सवार होने वाला कोई नहीं था। केवल एक यात्री बस से उतरा। लगभग ऐसा ही हाल शहर के बाकी हिस्सों में भी था।
मास्क लगाने को लेकर दिखी सतर्कता
दिल्ली देहात में एक वाकया सामने आया, जिसमें यात्रियों की बस ड्राइवर, कंडक्टर व सिविल डिफेंस कर्मी से मास्क लगाने को लेकर बहस हो गई। मामला अलीपुर क्षेत्र का है। शनिवार को बस ड्राइवर का मास्क खिसककर नीचे आ गया, जिस पर यात्रियों ने उसे टोक दिया। लोगों ने सिविल डिफेंस कर्मी से इसकी शिकायत की। ड्राइवर, कंडक्टर, सिविल डिफेंस कर्मी यह बात मानने को तैयार नहीं थे कि बस ड्राइवर का मास्क नीचे था। यात्री सीसीटीवी कैमरे में सच्चाई जांचने की जिद करने लगे और देखते ही देखते बात बढ़ गई। किसी ने 100 नंबर डायल कर पुलिस को बुला लिया। पुलिस की मौजूदगी में भी कहासुनी होती रही और कुछ देर के बाद मामला सुलझ सका।