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कंरट से मौत के मामले में बीएसईएस राजधानी दोषी, 10 लाख मुआवजे का आदेश 

Thu, 21 Jan 2021 05:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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बिजली का करंट लगने से 23 वर्षीय युवक की मौत के मामले में लापरवाही के लिए हाईकोर्ट ने बीएसईएस को जिम्मेदार ठहराया है। अदालत ने युवक की मौत पर बीएसईएस राजधानी व रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से मृतक के माता-पिता को बतौर 10 लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। घटना वर्ष 2007 में कालका जी इलाके की है।

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न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि इलाके में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी करंट से मौत की जिम्मेदार मानी जाएगी। मृतक के इलाके में बीएसईएस बिजली सप्लाई करती है ऐेसे में लापरवाही के लिए वह जिम्मेदार है।

अदालत ने बिजली कंपनी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि याची ने मुआवजे के लिए 12 वर्ष बाद याचिका दायर की है ऐसे में याचिका विचारयोग्य नहीं है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मृतक इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से स्नातक कर रहा था। 
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स्नातक करने के बाद वह कम से कम 10 से 15 हजार रुपए प्रति माह आय अर्जित करता। अदालत ने कहा कि पूरे तथ्यों से स्पष्ट है कि बिजली कंपनी के खुले तार छोड़ने के कारण ही कंरट लगने से युवक की मौत हुई।

अदालत ने कहा कि पुलिस की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि 16 मई 2007 को युवक मिंटू कुमार झा साईकिल पर जा रहा था। रात्रि बारिश के कारण खुले बिजली के तारों में करंट आ गया और उसकी चपेट में आने से मिंटू की मौत हुई। ऐसे में मृतक की मां मुआवजा पाने की हकदार है।

अदालत ने कहा कि सभी तथ्य देखने के बाद वे युवक की लापरवाही से मौत के लिए बीएसईएस राजधानी कंपनी को जिम्मेदार ठहराते हैं। अदालत ने उसे व संबंधित बीमा कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया कि वे संयुक्त रूप से तीन माह में10 लाख रुपए का बतौर मुआवजा अदा करे।

अदालत ने यह फैसला मृतक की मां मुन्नी देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। बिहार दरभंगा निवसी मुन्नी देवी ने तर्क रखा था कि उनके पति लेबर का काम करते हैं और उनकी आय मात्र चार हजार रुपये प्रति माह है। वहीं उनका बेटा मिंटू पढ़ाई के साथ प्राईवेट काम करता था जिससे घर का गुजारा होता था। 

उन्होंने कहा कि मिंटू की मौत के बाद उसका भाई सोनू झा अवसाद में आ गया और उसकी भी 27 अक्टूबर 2010 को मौत हो गई। इस हादसे के कारण उसे दो पुत्रों को खोना पड़ा। ऐसे में उन्हें 30 लाख रुपये मुआवजा दिलवाया जाए।

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