दक्षिण जिले के स्पेशल स्टाफ ने मेवात के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो एटीएम से रकम निकालते समय खड़-खड़ की आवाज आने पर बीच में ही पकड़ लेते थे। ऐसे में निकाले गए रुपये की एंट्री भी नहीं होती थी। उसके बाद खुद ही इस जालसाजी की पुलिस में शिकायत कर देते थे। जालसाजी का ये तरीका देश में पहली बार सामने आया है। इसके अलावा, एटीएम को चाबी से खोलने के बाद लाइट भी बंद कर रुपये निकाल लेने में माहिर थे।
स्पेशल स्टाफ ने इस गिरोह के दो सदस्य जोकि जीजा-साले हैं, को दबोचा है। आरोपी छह महीने से जालसाजी कर रहे थे। पुलिस ने इनके पास से दो स्वचालित पिस्टल व पांच कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस ठगी के इस तरीके के बारे में बैंकों को जानकारी दे रही है।
दक्षिण जिला डीसीपी अतुल कुमार ठाकुर के अनुसार, स्पेशल स्टाफ में तैनात सिपाही योगेंद्र को नौ जून को सूचना मिली थी कि एटीएम से रकम निकालकर जालसाजी करने वाले मेवात के एक गिरोह के दो सदस्य कार में साकेत इलाके में आएंगे। इन सदस्यों के पास हथियार भी होंगे। स्पेशल स्टाफ प्रभारी अतुल त्यागी की देखरेख में एसआई संजय शर्मा, एएसआई अनिल व हवलदार रमेश की टीम ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।
इनकी पहचान मोहल्ला महालिया गांव धसेदा नूंह हरियाणा निवासी जाबिद हुसैन (32) और मोहल्ला पातकपुरा, पुन्हाना नूंह हरियाणा निवासी मो. आबिद (38) के रूप में हुई। मो.आबिद जाबिद हुसैन का जीजा है। इनके पास से 15 डेबिट कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड, एटीएम मशीन खोलने की तीन चाबियां और कार बरामद की गई है।
ऐसे करते थे ठगी
आरोपी दो तरीके से ठगी करते थे। पहला, ये किसी का डेबिट कार्ड उधार लेकर या फिर लेकर एटीएम से पैसे निकालने जाते थे। डेबिट कार्ड को एटीएम में डालते थे और जैसे ही पैसे निकलते थे और पैसे निकलने की खड़-खड़ की आवाज होती थी तो ये पैसे को मशीन में ही पकड़ लेते थे। ये पैसे को पकड़कर रखते थे और तभी एटीएम की लाइट बंद कर देते थे। इसके बाद ये पैसे को बाहर निकालते थे।
ऐसे में रकम निकालने की खाताधारक के खाते में एंट्री नहीं होती थी। इसके बाद ये एटीएम की लाइट को शुरू कर देते थे। दूसरा तरीका ये था कि ये एटीएम को चाबी से खोलकर पैसे निकालते थे। इस तरीके में ये लाइट को एटीएम के अंदर से बंद कर देते थे। अगर खाताधारक के मोबाइल पर पैसे निकलने का मैसेज आ गया तो ये पुलिस में शिकायत करते थे कि उनके खाते से पैसा निकला नहीं और मैसेज आ गया। ये इस तरीके से पैसे निकालते थे कि खाता धारक के खाते में पैसे निकलने की एंट्री नहीं होती थी।