1 अप्रैल से 31 मई के बीच दूसरी लहर के दौरान कोरोना से हुई मौतों के मामले में दिल्ली सरकार और नगर निगम आमने-सामने हैं। नगर निगम का कहना है कि राजधानी में 61 दिन में 18 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई। उधर, दिल्ली सरकार के हेल्थ बुलेटिन के अनुसार इस दौरान 13 हजार लोगों की ही मौत हुई। अब हालात यह हैं कि अप्रैल और मई में हर दिन औसतन 87 मौतें सरकारी कागजों से लापता हैं। निगम और सरकार की लड़ाई में पांच हजार से भी ज्यादा मौतों के बारे में कहीं जानकारी नहीं है।
निगम के आंकड़ों के अनुसार, इन 61 दिन में कोरोना से 18,480 मौतें हुई हैं। उत्तरी निगम में 7831, दक्षिणी निगम में 8228 व पूर्वी निगम में 2421 मौतें दर्ज हुईं। उधर, दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस अवधि में केवल 13201 लोगों की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग के, कोरोना से पहली दो मौतें 29 मार्च 2020 को हुई थीं। तब से 31 मार्च 2021 तक 11036 लोगों की मौत हुई। इसके बाद एक जून को यह आंकड़ा 24237 दर्ज किया गया। निगम के अनुसार, एक अप्रैल से 31 मई के बीच दिल्ली में रोज औसतन 303 लोगों की मौत कोरोना से हुई। स्वास्थ्य विभाग ने रोज औसतन 216 मौतें होने की पुष्टि की है।
निगम के अधिकारी की मानें तो इस वर्ष अप्रैल व मई में हालात सबसे बुरे रहे। हर दिन 300 से ज्यादा लोगों के अंतिम संस्कार करने पड़े। इस कारण श्मशान घाटों में निगम को अतिरिक्त चिताओं की व्यवस्था करनी पड़ी थी। वर्तमान में 28 स्थानों पर 1184 चिताओं को आरक्षित किया गया है।
आंकड़ों में लगातार दिखा उतार-चढ़ाव
निगम और राज्य सरकार के आंकड़ों में दिन के मुताबिक भी उतार-चढ़ाव रहा है। रिपोर्टों की तुलना करें तो 15 मई को निगम ने 308 लोगों की मौत दर्ज की, जबकि दिल्ली सरकार के बुलेटिन में यह 29 अधिक 337 हैं। 18, 19, 20 और 21 मई को क्रमश: 40, 29, 10 और 92 मौतों का अंतर रहा। 22 मई को निगम ने 156 शवों के अंतिम संस्कार की पुष्टि की, जबकि दिल्ली सरकार ने 182 लोगों की मौत होने की सूचना दी।
पिछले वर्ष भी यही थी स्थिति
कोरोना काल में मौतों के आंकड़ों पर दिल्ली सरकार व निगम पिछले साल भी आमने-सामने हुए थे। पिछले वर्ष मई में निगम ने 2116 मौतों का दावा किया था, जबकि दिल्ली सरकार इससे कम बता रही थी। उस समय भी काफी दिन तक राजनीतिक गलियारे में इस विषय को लेकर काफी सरगर्मी रही थी।
13 अप्रैल से बढ़ी जान गंवाने वालों की तादाद
नगर निगम के अनुसार, कोरोना से जान गंवाने वालों की तादाद 13 अप्रैल से बढ़नी शुरू हुई थी। इस दिन निगम ने 170 मौतें होने का दावा किया है। अगले दिन ही आंकड़ा 200 के पार पहुंच गया था, जो चार दिन तक जारी रहा। 18 अप्रैल को 319 मौतों के साथ यह चढ़ना शुरू हुआ और 29 अप्रैल को 717 तक पहुंच गया। यह एक दिन में सबसे अधिक था। 30 अप्रैल से मौत के आंकड़ों में कमी आनी शुरू हो गई थी। 31 मई को तीनों नगर निगमों में केवल 50 मौतें दर्ज हुईं।
आंकड़े छिपाने की मंशा नहीं : स्वास्थ्य विभाग
इस संबंध में अमर उजाला ने स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया तो एक उच्च अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि आंकड़े छिपाने की कभी मंशा नहीं रही। अस्पतालों पर बीते दिनों जो अतिरिक्त बोझ पड़ा, वह किसी से छिपा नहीं है। उस वक्त मौतों के आंकड़े गिनने से ज्यादा जरूरी मरीजों की जान बचाना था। अस्पतालों से जैसे-जैसे मौत की जानकारी मिलती गईं, उन्हें अपडेट किया गया। बुलेटिन में बताए गए आंकड़े सही हैं।