बर्ड फ्लू को देखते हुए एक दिन पहले संजय झील में पक्षियों को मारने के बाद भी बत्तख बची हुई है। इससे पार्क में अभी भी बर्ड फ्लू का डर बना हुआ है। वहीं, पार्क बंद होने के बाद भी लोगों का प्रवेश थम नहीं रहा है।
दरअसल, सोमवार को पशुपालन विभाग ने बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए करीब 391 पक्षियों को मार दिया था। इनमें 371 बत्तख और 20 मुर्गे शामिल थे। अधिकारियों का कहना था कि तीन से चार दिन में सभी बत्तखें भी बर्ड फ्लू से मर जाती। वहीं, संक्रमण का भी खतरा था।
मंगलवार को अमर उजाला ने पार्क में पहुंचकर जायजा लिया तो देखा कि यहां झील में अभी भी एक बत्तख बची हुई है। हालांकि, अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि बत्तख बीमार है। बताया जा रहा है कि बची हुई बत्तख को भी अधिकारियों ने सोमवार को निकालने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बाद भी बत्तख नहीं निकल सकी। ऐसे में संजय झील में अभी भी बर्ड फ्लू का संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।
गौरतलब है कि सोमवार को बत्तखों को मारने के बाद प्रोटोकॉल के मुताबिक पार्क में ही गहरा गड्ढा कर दफनाया दिया था। वहीं, संजय झील को अलर्ट जोन घोषित किया था।
संजय झील पार्क जबरदस्ती प्रवेश कर रहे लोग
बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने संजय झील को आगामी तीन सप्ताह के लिए आम जनता के लिए बंद कर दिया है। साथ ही इसे अलर्ट जोन भी घोषित किया है, लेकिन इसके बाद भी लोग पार्क में प्रवेश कर रहे हैं।
स्थानीय चौकीदार के मुताबिक, एक जगह से पार्क की दीवार टूटी होने की वजह से लोग पार्क में प्रवेश कर धूप का आनंद ले रहे हैं। जब उन्हें बर्ड फ्लू के खतरे की आशंका को देखते हुए मना किया जाता है तो वह जोर-जबर्दस्ती पर उतर आते हैं। इस वजह से बर्ड फ्लू का खतरा भी फैलने का डर बना हुआ है। एक अन्य कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ लोग बत्तखों के दफनाने के स्थान पर भी पहुंचने की कोशिश करते हैं।