दिल्ली-एनसीआर में इस बार सर्दियों में प्रदूषण गंभीर स्तर पर रहा। गाजियाबाद में हालात सबसे खराब रहे। राष्ट्रीय राजधानी में उत्तरी दिल्ली सर्वाधिक प्रदूषित रही। हॉटस्पॉट (जहांगीरपुरी) में पीएम 2.5 का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा। इस बार की सर्दियों में धुंध भी कम दिन के लिए रही।
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) के अध्ययन के मुताबिक, 15 अक्तूबर से 1 फरवरी के दौरान ग्रेडेड एक्शन प्लान (ग्रेप) लागू होने के बाद पर्यावरण और प्रदूषण स्तर में बदलाव दिखा। सीएसई की कार्यकारी निदेशक (शोध एवं परामर्श) अनुमिता रॉयचौधरी के मुताबिक, सर्दियों में अनलॉक के दौरान परिवहन सेवाओं की शुरुआत, लोगों का आवागमन बढ़ने, शांत हवा और ठंड जैसे कारकों से प्रदूषण गंभीर स्तर पर रहा।
हालांकि स्थानीय और क्षेत्रीय कारणों से सर्दियों में इस बार दिल्लीवासियों को धुंध का सामना कुछ कम दिन करना पड़ा। सीएसई के विशेषज्ञ अविकल सोमवंशी के मुताबिक, पीएम-2.5 का स्तर कम रहा। सर्दियों के दौरान मौसम में होने वाले परिवर्तन के कारण प्रदूषण नियंत्रण समस्या बना है।
लंबे समय से प्रदूषण पर शिकंजा कसने के लिए उठाए जा रहे कदमों के परिणाम भी धीरे-धीरे आने लगे हैं। प्रदूषण का कारण स्थानीय ज्यादा है। मौसम में बदलाव के अध्ययन में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सफर और मौसम विभाग के आंकड़ों को शामिल किया गया है। 81 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों के आंकड़ों से पता चला है कि सर्दियों में धुंध की अवधि इस बार कम रही।
सर्वे में हुए खुलासे
- सर्दियों में धुंध की अवधि कम रही।
- पीएम2.5 का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा।
- लंबे समय तक दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण खराब स्तर पर रहा।
- पीएम2.5 और धुंध 23 दिन गंभीर स्तर पर रहे। 2018-19 में यह आंकड़ा 33 था।
- प्रदूषण उत्तरी दिल्ली में सर्वाधिक और पश्चिमी दिल्ली में सबसे कम रहा।