दिल्ली में तेजी से शहरीकरण होने के बीच मास्टर प्लान में महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान देने की मांग उठी है। नागरिक समाज संगठन और सार्वजनिक नीति विशेषज्ञों के एक समूह ने गुरुवार को मास्टर प्लान-2041 के मसौदे में सभी वर्गों संबंधी मुद्दों पर एक अलग अध्याय जोड़ने का आग्रह किया।
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मैं भी दिल्ली अभियान के बैनर तले संवाददाता सम्मेलन में बताया गया कि 40 से अधिक नागरिक समाज समूहों, कार्यकर्ताओं, शोधकर्ताओं और नागरिकों का एक समूह पिछले तीन वर्षों में मास्टर प्लान संशोधन प्रक्रिया में लगा हुआ है। इस दौरान कल्पना विश्वनाथ ने कहा कि निर्भया गैंगरेप और हत्या के मामले ने महिलाओं की सुरक्षा के मामले में दिल्ली की छवि और धारणा को बदल दिया था और कई परिवार अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए शहर भेजने से हिचकिचा रहे थे। मास्टर प्लान के मसौदे में इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है, इसमें महिला सुरक्षा के लिए अलग से अध्याय जोड़ना चाहिए। इसके अलावा समाज के अन्य कमजोर वर्ग बच्चों, बुजुर्गों, ट्रांसजेंडरों, बेघरों और हाशिए पर गए लोगों को अध्याय में शामिल किया जाना चाहिए।
विश्वनाथ ने कहा कि डीडीए को रात के समय गतिविधिया शुरू करने का प्रावधान करने से पहले महिलाओं और अन्य लोगों के लिए देर रात बाहर निकलने के दौरान उनके सुरक्षित होने के बारे में मालूम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे मास्टर प्लान के मसौदे में संशोधन के लिए यह सब मांग करेंगे।
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इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन सेटलमेंट्स (आईआईएचएस) के पदाधिकारी गौतम ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण कम से कम तीन महीने तक सुझाव और आपत्तियां देने के लिए समय देना चाहिए।