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दिल्ली के बाजार : विदेश तक जाती है यहां की सुगंध, अरब देशों में भी फैला है कारोबार

Sat, 24 Jul 2021 05:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली

सार

  • देश-विदेश को महका रही सीलमपुर की खुशबू
  • धूप-अगरबत्ती के लिए मशहूर है दिल्ली का यह थोक बाजार
  • अरब देशों समेत दक्षिण-एशिया व यूरोप तक पहुंचता है माल
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demo pic... - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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यदि आप पूर्वी दिल्ली में जीटी रोड पर सफर कर रहे हैं और अचानक चंपा, चमेली, गुलाब, केवड़ा, चंदन, मोगरा की भीनी-भीनी खुशबू आपको तरोताजा कर दे तो हैरान न होना। क्योंकि, आप उस वक्त ऐसे इलाके से गुजर रहे होंगे, जो आम लोगों में खुशबूनगरी के तौर पर जाना जाता है। यहां की खुशबू सिर्फ दिल्ली ही नहीं, देश-विदेश के वातावरण को भी महका रही है।

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बात सीलमपुर की धूप अगरबत्ती की थोक मार्केट की हो रही है। पूर्वी दिल्ली के इस बाजार से हर साल 50 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यहां बनी धूप-अगरबत्ती की मांग देश-विदेश में है। यहां तैयार उत्पाद अरब देशों समेत दक्षिण-पूर्व एशिया में भी जाता है। दूसरे कई देशों के निर्यातक भी यहां की अगरबत्ती के खरीददार हैं।

कारोबारियों का कहना है कि दूसरे कारोबार की तरह धूप-अगरबत्ती बाजार पर भी कोरोना का असर पड़ा है। करीब 50 फीसदी मांग कम हो गई है। ज्यादा गिरावट विदेशी बाजारों में हुई है। देश के भीतर की मांग कमोबेश पहले की तरह ही बनी हुई है। उन्हें उम्मीद है कि सुगंध बिखेरने की अपनी प्रकृति की वजह से इनका कारोबार आने वाले दिनों में फिर पटरी पर लौटेगा।
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ऐसे बनती हैं धूप-अगरबत्ती
अगरबत्ती तैयार करने के लिए कच्चा माल दूसरे राज्यों से आता है। इसमें इत्र, कच्ची अगरबत्ती का पाउडर व डीईपी तेल आदि शामिल है। इन उत्पादों से मशीन के सहारे अगरबत्ती बनाई जाती है। अंत में इसकी पैकिंग करके बाजार में भेज दिया जाता है। इसी तरह धूपबत्ती के लिए तेल, लकड़ी का बुरादा, बिरोजा व कस्सा पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। कस्सा का इस्तेमाल खुशबू और बिरोजा धूपबत्ती में चिपचिपापन लाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा मच्छरों को भगाने के लिए नीम के तेल से अगरबत्तियां भी तैयार की जाती हैं।

इन स्थानों से मंगाया जाता है माल
इत्र : चेन्नई और अहमदाबाद
अगरबत्ती पाउडर : वियतनाम, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब
डीईपी तेल : महाराष्ट्र
कस्सा पाउडर : कन्नौज
बिरोजा : दिल्ली
पैकिंग के लिए गत्ते : दिल्ली

10-20 हजार रुपये में शुरू कर सकते हैं व्यापार
यदि आप कम लागत में व्यापार की शुरुआत करने चाहते हैं तो सीलमपुर का यह बाजार आपके लिए सही पता हो सकता है। यहां आपको थोक के दामों में धूप-अगरबत्ती मिल जाएगी, जिसे आप अपना ब्रांड का नाम देकर अपने व्यापार की शुरुआत कर सकते हैं। इसके अलावा आपको यहां से अगरबत्ती और धूप को तैयार करने के लिए तेल, पाउडर व अन्य सामग्री भी थोक के दामों में मिल जाएगी। कच्चे माल की मदद से आप चाहे तो शुुरुआत में हाथों से भी अगरबत्तियां तैयार कर सकते हैं।

सीलमपुर को खुशबू नगरी घोषित करने की हुई थी मांग
पूरे इलाके को सुगंधित करने की वजह से पूर्व में सीलमपुर को खुशबू नगरी नाम से पहचान देने की भी मांग गई। अगरबत्ती एसोसिएशन के नवज्योति ट्रेडर्स एसोसिएशन की ओर से करीब सात साल पहले तत्कालीन विधायक से सीलमपुर का नाम खुशबू नगरी रखने का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, बाद में यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।

बोले कारोबारी...
55 वर्षों से यह बाजार बना हुआ है, जो देश-विदेश में अपनी सुगंध फैला रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से कच्चा माल मंगाकर यहां से आगे बेचा जाता है। कोरोना की वजह से व्यापार में 50 फीसदी का प्रभाव पड़ा है।
- रामनिवास गुप्ता, अध्यक्ष, नवज्योति ट्रेडर्स एसोसिएशन

यहां कुल 23 दुकानें हैं, जिनसे बड़ी मात्रा में थोक दामों पर माल की आपूर्ति की जाती है। शुरुआत में केवल दो-तीन दुकानें हुआ करती थी। समय के साथ-साथ यहां बाजार का विकास हुआ और और आज यह दिल्ली में मशहूर है।
- विनोद गुप्ता, कारोबारी

देश के बड़े नामी धूप अगरबत्ती वाली कंपनियों के कभी यहां छोटे कारखाने होते थे। समय के साथ उन्होंने तरक्की की और पूरे देश में बड़ा नाम बन गई हैं। आज भी कई बड़े ब्रांड यहां हैं, जिनके नाम की धूपबत्ती की बाजारों में मांग बनी हुई है।
- कैलाश गुप्ता, कारोबारी

हम पिछले कई वर्षों से पूरी दिल्ली को महका रहे हैं। यहां की धूप-अगरबत्ती की महक अधिकांश घरों में मिल जाएगी। अच्छी बात यह है कि यहां मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर थोक के दामों को तय किया गया है।
- अरुण गोयल, कारोबारी

पहले यहां हाथों से ही अगरबत्तियां तैयार करवाई जाती थी, लेकिन उनके लिए अधिक दाम देने पड़ते थे। समय के साथ बदलाव हुआ और कारीगरों की जगह मशीनों ने ले ली। अब मशीनों से कम समय में अधिक उत्पादन हो जाता है।
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- विनय गुप्ता, कारोबारी

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