दिल्ली जल बोर्ड ने राजधानी में पानी की किल्लत और दूषित जल के लिए हरियाणा और पंजाब को जिम्मेदार ठहराया है। जल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि हरियाणा और पंजाब के रवैये के कारण दिल्ली में करीब 30 फीसदी पानी की आपूर्ति में कमी आई है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में दिल्ली जल बोर्ड ने कहा है कि हरियाणा और पंजाब न केवल राजधानी को कम पानी की आपूर्ति कर रहे हैं बल्कि दूषित पानी भी दे रहे हैं। यही कारण है कि यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ गया है। दोनों राज्य शीर्ष अदालत के पूर्व आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं।
दिल्ली जल बोर्ड ने कहा है कि हरियाणा में पेयजल की कमी नहीं है। दिल्ली की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वह पानी के लिए हरियाणा और पंजाब पर निर्भर है। दिल्ली के लिए पानी उपलब्ध करना हरियाणा व पंजाब का दायित्व है लेकिन वे कर्तव्यों का पालन नहीं कर रहे है ।
दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य अभियंता एमके हंस की ओर से दायर इस हलफनामे ने हरियाणा और पंजाब के इस दावे को खारिज कर दिया है कि उनकी तरह से तो पानी की आपूर्ति कम की गई और न ही दूषित पानी की आपूर्ति की जा रही है। इन दोनों राज्यों की ओर से कहा गया था कि दिल्ली में दूषित पानी के लिए दिल्ली खुद जिम्मेदार है।
बोर्ड ने कहा है कि इन दोनों राज्यो के कारण वजीराबाद, चंद्रावल और ओखला जल शोधन संयत्र में पानी की कमी हो गयी है। जिस कारण से दिल्लीवासियों को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वजीराबाद जलाशय में अमोनिया का स्तर 4.4 पीपीएम है, जो बहुत उच्च स्तर है। साथ ही यह भी कहा गया है कि वजीराबाद संयंत्र अपनी क्षमता का 71 फीसदी, चंद्रावल 84 फीसदी और ओखला 86 फीसदी ही काम कर रहा है। जल बोर्ड ने हरियाणा और पंजाब के इस आरोप को भी खारिज कर दिया है कि दिल्ली के पास जल शोधन की तकनीक पुरानी है।
सनद रहे कि शीर्ष अदालत, दिल्ली जल बोर्ड की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें हरियाणा और पंजाब पर पानी की आपूर्ति कम करने का आरोप लगाया है। साथ ही दूषित पानी की आपूर्ति का भी आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हरियाणा व पंजाब को यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा है।