टेलीग्राम मामले में शुक्रवार को होगी सुनवाई
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली हाईकोर्ट 19 जून को टेलीग्राम की याचिका पर आदेश सुनाएगा। इस याचिका में केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती दी गई है। केंद्र सरकार ने नीट री-एग्जाम पेपर लीक की गंभीर चिंताओं के कारण यह प्रतिबंध लगाया है। यह रोक 22 जून तक प्रभावी रहेगी। जस्टिस तेजस करिया ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें ध्यान से सुनीं। उन्होंने 18 जून को सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था।
टेलीग्राम ने सरकार के इस कदम को अनुचित बताया है। सरकार का कहना है कि यह कदम परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। साथ ही, यह पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में भी मदद करेगा। कोर्ट का यह फैसला इस पूरे मामले में एक अहम मोड़ साबित होगा।
टेलीग्राम याचिका पर फैसला सुरक्षित
बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को टेलीग्राम की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें मैसेजिंग ऐप ने 21 जून को होने वाली NEET-UG री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार द्वारा उस पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति तेजस करिया की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ ने टेलीग्राम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता तथा केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
टेलीग्राम की संरचना पर प्रश्न
तुषार मेहता ने कहा कि टेलीग्राम का तकनीकी ढांचा अन्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स से काफी अलग है। उनके मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में बॉट्स बनाए जा सकते हैं और उनके जरिए किसी भी कंटेंट को तेजी से फैलाया जा सकता है। यही कारण है कि गलत सूचनाओं और गैरकानूनी सामग्री पर नियंत्रण करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि नियमों का पालन न करने के कारण कई देशों ने टेलीग्राम के खिलाफ कार्रवाई की है।
टेलीग्राम ने आदेश पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक समीक्षा समिति ने टेलीग्राम के अधिकारियों की दलीलें भी सुनी थीं और उनका रिकॉर्ड तैयार किया था। टेलीग्राम की ओर से तर्क दिया गया कि कानून इस तरह के विभाजन या अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर कार्रवाई की अनुमति नहीं देता। कंपनी का कहना है कि यदि आदेश का मूल आधार ही गलत साबित होता है, तो पूरा आदेश टिक नहीं सकता। अदालत ने टेलीग्राम के इस तर्क को रिकॉर्ड पर लिया और कहा कि मामले के दोनों पहलुओं पर विचार किया जाएगा। टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के आदेश में कानूनी खामियों का भी आरोप लगाया है। हालांकि, दूसरी ओर समीक्षा समिति ने सर्वसम्मति से अंतरिम निर्देशों को बरकरार रखने की सिफारिश की थी।