उच्च न्यायालय ने आदेश के बावजूद सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया वेतन व पेंशन का भुगतान नहीं करने पर कड़ा रुख अपना लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कि कर्मचारी अपने हक के पैसे का अंतहीन समय तक इंतजार नहीं कर सकते हैं। ऐसे में अब उत्तरी एमसीडी की संपत्ति जब्त कर उनके बकाया राशि का भुगतान करवाएगी। अदालत ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) को अपनी संपत्ति की सूची एवं बैंक बैलेंस का विवरण देने को कहा है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया वेतन व पेंशन का भुगतान मामले में सुनवाई करते हुए इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि अदालत के बार-बार आदेश के बावजूद कर्मचारियों को बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है और जो कर्मचारी अपनी जिंदगी के अहम पल सेवा में लगा चुके है और आज वे अपने ही पैसे पाने के लिए भटक रहे है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अब जवाब मांगने या जवाब देने का समय नहीं है। अब जरूरी है कि एमसीडी की संपत्ति को जब्त कर उससे प्राप्त राशि से कर्मचारियों को उनका पैसा दिलवाया जाए। अदालत ने उत्तरी एनडीएमसी को अपनी सभी संपत्ति की सूची एवं बैंक बैलेंस का पूरा विवरण पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अब मामले की सुनवाई 8 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।
पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आप चाहे भीख मांगे, उधार लीजिए या चोरी करें लेकिन कर्मचारियों के बकाया का भुगतान करें। अदालत अखिल दिल्ली प्राथमिकता शिक्षक संघ की याचिका पर सुनवाई कर रही है। संघ की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता रंजीत शर्मा ने बकाया का भुगतान नहीं करने पर एनडीएमसी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की।
इससे पहले कोर्ट ने राशि का भुगतान करने संबंधी 5 अप्रैल के आदेश की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया था। उसने डाक्टरों का वेतन नहीं मिलने के संबंध में आई एक न्यूज रिपोर्ट को देखते हुए एक जनहित याचिका भी शुरू की थी। इसके बाद कई अन्य याचिकाएं भी दायर हुई थी और कोर्ट पहले भी कई निर्देश दे चुकी है।