उच्च न्यायालय ने नीट-पीजी 2023 परीक्षा में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए योग्यता प्रतिशत को घटाकर शून्य यानी सभी श्रेणियों में शून्य से 40 अंक कम करने के खिलाफ विभिन्न डॉक्टर उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय व अन्य से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति पुरुषइंद्र कुमार कौरव ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अलावा नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी से जवाब मांगा है। यह याचिका तीन एमबीबीएस डॉक्टरों द्वारा दायर की गई है जिन्होंने 5 मार्च को एनईईटी पीजी परीक्षा दी थी और काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग ले रहे है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा 20 सितंबर को जारी एक अधिसूचना को चुनौती दी है जिसमें परीक्षा के लिए अर्हता प्रतिशत कम कर दिया गया है।
पात्रता मानदंड को घटाकर शून्य प्रतिशत यानी शून्य से 40 अंक करने से एनईईटी पीजी परीक्षा आयोजित करने का मूल उद्देश्य ही विफल हो गया है। याचिका में कहा गया है कि यदि पात्रता के भागफल को ही कमजोर कर दिया जाता है, तो यह राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के पूरे उद्देश्य को भी धूमिल कर देता है।