उच्च न्यायालय ने अवैध फेरीवालों (हॉकर) की बढ़ती संख्या पर चिंता जाहिर करते हुए बुधवार को कहा, हम शहर को बर्बाद होने की अनुमति नहीं दे सकते और हम यहां कानून के शासन की रक्षा के लिए हैं। अदालत ने कहा कि दिल्ली का क्षेत्रफल स्थिर है जबकि आबादी बढ़ती जा रही है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा, आज हमारे लिए चिंता का विषय है कि फेरीवालों की संख्या कितनी है? आपकी आबादी भले ही बढ़ती रहे लेकिन दिल्ली का क्षेत्रफल स्थिर है। तो आप कितने ऐसे विक्रेताओं को अनुमति देने जा रहे हैं? पीठ ने कहा कि अदालत हमेशा कहती रही है कि वह विक्रेताओं और फेरीवालों को आर्थिक व्यवस्था के आवश्यक हिस्से के तौर पर मान्यता देती है, लेकिन हम हैरान हैं।
पीठ ने कहा करीब 120 तहबाजारी अधिकार धारकों के स्थान पर लगभग 4000 (विक्रेता) हैं... लोग कहां चलते हैं? हम एक और लाजपत नगर नहीं चाहते। हमें दूसरा नेहरू प्लेस नहीं चाहिए। पीठ ने चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए दिल्ली सरकार, उत्तरी दिल्ली नगर निगम और टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) आदि से जवाब मांगे हैं।
याचिका में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) योजना, 2019 के विभिन्न प्रावधानों को रद्द करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव राल्ली और वकील मोहित मुद्गल ने कहा कि यह योजना मनमानी, भेदभावपूर्ण, अवैध और मूल कानून तथा नियमों के विपरीत है।
पीठ ने अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। जब वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने तीन महीने का समय देने का अनुरोध करते हुए कहा कि चीजें ठीक हो जाएंगी, तो पीठ ने कहा, तीन महीने भूल जाइए, तीन महीने बहुत लंबा समय है, एक दिन भी नहीं।
क्या नियोक्ता अपने कर्मचारी को टीकाकरण के लिए बाध्य कर सकता
नई दिल्ली। क्या नियोक्ता अपने कर्मचारी को कोविड टीकाकरण के लिए बाध्य कर सकता है? इस मुद्दे पर हाईकोर्ट ने एक स्कूल टीचर की याचिका पर दिल्ली सरकार व राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, गौतमपुरी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में स्कूल टीचर ने नियोक्ता द्वारा जारी उस परिपत्र को चुनौती दी है, जिसमें सेवाएं प्रदान करने के लिए कोविड-19 टीकाकरण कराना अनिवार्य है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने इस मामले को एक निजी सहायता प्राप्त स्कूल में कार्यरत एक शिक्षक द्वारा दायर एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया है, जिसमें दिल्ली सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है कि शहर के स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को स्कूलों में भाग लेने की अनुमति नहीं है, अगर वे 15 अक्तूबर तक टीका लगाने में विफल रहते हैं।
हाईकोर्ट ने फिलहाल याची को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि दूसरों की जान को खतरे में नहीं डाल सकते। इस मामले में स्कूल द्वारा जारी सर्कुलर को चुनौती दी गई है। सर्कुलर में कहा गया है कि ऐसे शिक्षक और अन्य कर्मचारी जिन्हें 15 अक्तूबर 2021 तक टीका नहीं लगाया गया है उन्हें छुट्टी पर माना जाएगा।