हाईकोर्ट ने गौर किया कि दिल्ली सरकार ने पहले बताया था कि प्राधिकारियों ने चार अक्तूबर को उक्त ढांचा ध्वस्त करने की योजना बनाई थी लेकिन अब मामले को धार्मिक कमेटी के समक्ष भेज दिया गया है। दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि धार्मिक कमेटी ने अभी तक ध्वस्तीकरण की अनुमति नहीं दी है, इसलिए कुछ भी कहने की हालत में नहीं हैं।
अदालत ने याची की उस दलील से सहमति जताई कि जब अधिकारियों ने उक्त ढांचे को गिराने का फैसला कर लिया था तो मामले को धार्मिक कमेटी को नहीं भेजा जा सकता था। ये स्पष्ट नहीं है कि क्या धार्मिक कमेटी इतने छोटे स्तर के मामलों को भी देखती है। अदालत ने अधिकारियों को संबंधित रिकार्ड पेश करने का निर्देश दिया है।