फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- एक गृहिणी की मौत की भरपाई नहीं कर सकता पैसा, बीमा कंपनी की दलीलें खारिज

Fri, 04 Aug 2023 06:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

अदालत एक गृहिणी की पत्नी, मां, बेटी, बहू आदि के रूप में निभाई जाने वाली भूमिका से परिचित है, जिसे मौद्रिक रूप में सटीक रूप से निर्धारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए पीड़ित परिवार को 15.95 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। 
विज्ञापन
Delhi High Court - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि एक गृहिणी की मौत के बाद परिवार को दिया जाने वाला मुआवजा उसके प्यार, देखभाल और गर्मजोशी की भरपाई नहीं कर सकता। अदालत एक गृहिणी की पत्नी, मां, बेटी, बहू आदि के रूप में निभाई जाने वाली भूमिका से परिचित है, जिसे मौद्रिक रूप में सटीक रूप से निर्धारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए पीड़ित परिवार को 15.95 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। 

विज्ञापन


न्यायमूर्ति गौरांग कंठ ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाली बीमा कंपनी की अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। ट्रिब्यूनल ने कंपनी को मोटर दुर्घटना में परिवार के सदस्यों के नुकसान के लिए दावेदारों को 17.38 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। बीमा कंपनी ने यह तर्क देते हुए अदालत का रुख किया कि आय और शिक्षा के प्रमाण के अभाव में एक गृहिणी की अनुमानित आय की गणना न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के आधार पर नहीं की जा सकती है। 

इसमें यह भी कहा गया कि एमएसीटी ने विशेष गृहिणी की अनुमानित आय की गलत गणना की। कंपनी ने यह भी कहा कि एमएसीटी ने व्यक्तिगत खर्चों के लिए कोई कटौती नहीं की और निर्भरता के नुकसान की गणना करते समय भविष्य में आय में वृद्धि की गणना के लिए अनुमानित आय में 25 प्रतिशत जोड़ा है। न्यायमूर्ति कंठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि कोई भी मौद्रिक मुआवजे को सटीक रूप से निर्धारित नहीं कर सकता है, भले ही अदालतें और न्यायाधिकरण कितनी भी कुशलता से इससे निपटें। 
विज्ञापन


बीमा कंपनी के तर्क खारिज
अदालत ने बीमा कंपनी  के इस तर्क को खारिज करते हुए कि एमएसीटी ने दावेदारों को भुगतान की जाने वाली राशि की गलत गणना की है,कहा कि एमएसीटी के आदेश में कुछ भी गलत नहीं है, क्योंकि अदालतों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी के आधार पर मृतक की काल्पनिक आय का निर्धारण करना होगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें