न्यायमूर्ति अनुक कुमार मेंदीरत्ता ने कहा कि ऐसा करने से आरोपी को मुकदमे के निपटारे तक असीमित अवधि के लिए जेल में डाल दिया जाएगा, भले ही अदालतों ने जमानत दे दी हो। यह कानून के शासन के सिद्धांत के खिलाफ होगा और संविधानिक जनादेश और मानवाधिकारों के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा। अदालत ने यह आदेश जिम्बाब्वे की एक महिला नास्तोर फरीराई जिसो द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिया। महिला पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत अपराध का आरोप लगाया गया है।
अदालत को बताया गया कि 20 अप्रैल, 2021 को महिला को एक लाख की राशि के निजी मुचलके और इतनी ही राशि में दो अन्य जमानती पेश करने पर जमानत दी गई थी। इसके बाद कई बार जमानत शर्तों में संसोधन किया गया और आखिर में अदालत ने उसी व्यक्तिगत बांड की राशि को घटाकर 50,000 कर दिया, यह कहते हुए कि समान राशि में एक जमानती भी पेश करना होगा।
याची ने कहा कि उसे भारत में काई नहीं जानता। ऐसे में वह जमानती पेश करने में असफल है। आवेदन में कहा गया है कि महिला पिछले दो साल आठ महीने से जेल में बंद है और विदेशी नागरिक होने के कारण कम सुरक्षा देने के अपने दायित्व का निर्वहन करने में भी असमर्थ है।