दिल्ली हाईकोर्ट में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की कथित निगरानी और वीडियोग्राफी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि अदालत ने टिप्पणी की कि सार्वजनिक स्थान पर भी व्यक्ति को निजता का अधिकार प्राप्त है।
दिल्ली हाईकोर्ट पूर्व जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष और सीपीआई(एम) नेता आईसी घोष द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस की कथित अतिक्रामक निगरानी और वीडियोग्राफी का विरोध किया गया है।
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मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा, 'ये जानवर नहीं हैं, ये देश के युवा हैं, देश के भविष्य हैं। मैंने कोई ऑफिस ऑर्डर नहीं देखा जो इस तरह की निगरानी की अनुमति देता हो। लड़कियां बारिश में भीग रही हैं, लेकिन पुलिस उनके सोते हुए वीडियो बना रही है। क्या यह आनुपातिकता का सिद्धांत पूरा करता है?'
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, 'आपका निजता का अधिकार सार्वजनिक स्थान पर भी उपलब्ध है।' याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि प्रदर्शनकारियों को धमकियां दी जा रही हैं कि उनके वीडियो माता-पिता और संस्थानों को भेज दिए जाएंगे। उन्होंने पूछा कि क्या कोई समिति इस निगरानी की निगरानी करती है या कोई भी पुलिस अधिकारी मनमाने ढंग से इसका इस्तेमाल कर सकता है।
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सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि की याचिका को दोपहर 2:30 बजे सुनाने का अनुरोध किया, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उसी समय एक अन्य याचिका पर पेश होने वाले हैं। अदालत ने इस पर सहमति जताई। गीतांजलि ने सिंगल जज के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में दोबारा याचिका लगाई है।