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दुष्कर्म मामले में वकील को मिली राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने सरेंडर की तारीख बढ़ाई, अब 17 नवंबर तक मोहलत

Thu, 13 Nov 2025 04:06 PM IST
राहुल तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले के आरोपी वकील को सरेंडर करने की समयसीमा 17 नवंबर तक बढ़ाई। आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। अदालत ने पहले उसकी जमानत रद्द कर दो न्यायिक अधिकारियों की जांच के भी आदेश दिए थे।
 
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दिल्ली हाईकोर्ट, Delhi High Court - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक महिला वकील द्वारा दर्ज कराए गए दुष्कर्म मामले में आरोपी वकील को सरेंडर करने के लिए दी गई। समयसीमा 17 नवंबर तक बढ़ा दी।न्यायमूर्ति अमित महाजन ने सात नवंबर को आरोपी की जमानत रद्द करते हुए उसे एक सप्ताह में ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि आरोपी किसी भी हालत में महिला वकील से संपर्क न करे, अन्यथा दिल्ली पुलिस उस पर उचित कार्रवाई कर सकती है।

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सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि जमानत रद्द करने के आदेश के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है, जिसे सोमवार को सूचीबद्ध किए जाने की संभावना है। इसलिए सरेंडर की समयसीमा एक सप्ताह और बढ़ाई जाए। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट ने यह कहते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी कि उसने कानून की प्रक्रिया में दखल देने का प्रयास किया है। साथ ही अदालत ने दो न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ भी प्रशासनिक जांच के आदेश दिए थे, जिन पर महिला वकील को बयान वापस लेने के लिए दबाव डालने का आरोप है।

अदालत ने कहा कि इस तरह के मामले में न्यायिक अधिकारियों की भूमिका सामने आना चौंकाने वाला और गंभीर है। अदालत ने टिप्पणी की कि भले ही यह आरोप जांच के अधीन हों, लेकिन ये न्याय व्यवस्था के प्रति घोर असम्मान को दर्शाते हैं। शिकायत में 27 वर्षीय महिला वकील ने कहा कि वह आरोपी से एक मित्र के माध्यम से मिली थी और एक पार्टी के दौरान उसके घर गई थी, जहां उसके साथ दुष्कर्म हुआ। आरोपी ने शादी का झांसा दिया क्योंकि वह विधुर था।
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महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी भावनात्मक दबाव बनाकर संबंध बनाता रहा और मई में वह गर्भवती हो गई। उसने यह भी दावा किया कि आरोपी के कुछ न्यायिक अधिकारियों से घनिष्ठ संबंध हैं और उन्होंने एफआईआर दर्ज होने से पहले और बाद में भी उसे प्रभावित करने की कोशिश की। महिला के वकील के अनुसार, एफआईआर के बाद एक न्यायिक अधिकारी ने उसे मेडिकल जांच न कराने की सलाह दी और समझौते के लिए 30 लाख रुपये की पेशकश की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उसी अधिकारी ने महिला को बयान नरम करने और आरोपी से आगे और मुआवजा लेने के लिए दबाव डाला।

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