कोरोना के गंभीर हालात के मद्देनजर हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से कोरोना मरीजों के लिए सुरक्षित बेड की संख्या की जानकारी 24 घंटे के भीतर मांगी है। इन सरकारों को मंगलवार तक अपना जवाब दाखिल करने हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी का हल निकालने के लिए कहा है।
हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण के मौजूदा हालात पर चिंता जताई और केंद्र सरकार से राज्यों में ऑक्सीजन आपूर्ति की स्थिति का पता लगाने का निर्देश दिया। अदालत ने अधिक जरूरत वाले स्थानों पर आपूर्ति बढ़ाने का भी निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि ये साफ है कि स्वास्थ्य सुविधाओं का बुनियादी ढांचा धराशायी हो गया है।
हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म आईनोक्स को कांट्रेक्ट का सम्मान करते हुए दिल्ली के अस्पतालों में आपूर्ति करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि वह फौरन दिल्ली के अस्पतालों के लिए 140 मीट्रिक टन सप्लाई को बहाल करे। ताकि सरकार इसे जरूरतमंद अस्पतालों को भेज सके।
हाईकोर्ट ने ये निर्देश उस याचिका पर दोबारा सुनवाई शुरू करते हुए दिया जिसमें कोरोना की जांच व बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने की मांग की गई थी। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि कोरोना संक्रमण दोबारा अपना सिर उठा रहा है और बीमारी इस बार कहीं ज्यादा तेजी से फैल रही है। अदालत ने कहा बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बिल्कुल धराशायी हो चुकी है।
केंद्र ने कहा उठा रहे कदम
केंद्र सरकार की स्थायी अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार ने अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन सप्लाई के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित विवरण का ब्यौरा वह हलफनामे में पेश करेंगी। याचिकाकर्ता अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली सरकार की चेतावनी के बाद घरों से नमूने और नई जांच करनी बंद कर दी हैं। दिल्ली सरकार ने 24 घंटे में रिपोर्ट देने या फिर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। अदालत ने कहा कि वह सरकार के इस रवैये को सही नहीं मानते। अदालत ने कहा कि सरकार का ये निर्देश लागू नहीं किया जाएगा।
रिपोर्ट में देरी पर लैब बंद करने की चेतावनी सही नहीं
राजधानी में लैब के बाहर जांच करवाने वाले लोगों की भारी भीड़ है। ऐसे में रिपोर्ट में देरी होने पर लैब बंद करने की दिल्ली सरकार की चेतावनी सही नहीं है। यह बात सोमवार को कोरोना संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए कही। खंडपीठ ने कहा कि अगर दिल्ली सरकार ने ऐसा निर्देश दिया है तो उसे लागू न किया जाए। क्या ऐसे समय में ऐसी चेतावनी देने की सलाह दी जा सकती है? लैब संचालकों का कहना है कि वे रोजाना 700 लोगों की रोजाना जांच कर रहे हैं। उनकी जांच और रिपोर्ट अपलोड करने के काम में उलझा हुआ है। ऐसे में रिपोर्ट पर देरी होने पर लैब बंद करने की चेतावनी नहीं दी जा सकती।
अदालत ने कहा कि सरकार के निर्देश के कारण लैब नए नमूने नहीं ले रहे हैं, अगर वे 24 घंटे में रिपोर्ट नहीं दे पा रहे हैं। अगर दिल्ली सरकार की ओर से कोई कार्रवाई की जाती है तो इसका बेहद बुरा प्रभाव होगा। हमें ये साफ करना होगा कि कोरोना मामलों की जांच बढ़ने से लैब पर भारी दबाव है। ऐसे में कोई लैब लापरवाही से या जानबूझकर जांच रिपोर्ट देने में देरी नहीं करेगी। हालांकि अदालत ने लैब को भी प्रभावी तरीके से लगन के साथ काम करने और शीघ्रता से रिपोर्ट तैयार कर 24 से 48 घंटे में दे देनी चाहिए।
वहीं दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि मुख्यमंत्री की उस प्रेस वार्ता से संबंधित कोई भी सामग्री पेश नहीं की गई है जिसमें ये कथित निर्देश दिया गया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में सरकार किसी लैब को बंद करने का जोखिम नहीं उठा सकती। सरकार ऐसा कुछ नहीं करेगी जिससे जांच में बाधा खड़ी हो।
मजदूरों को भोजन उपलब्ध कराएं राज्य
प्रवासी मजदूरों को उनकी निर्माण साइटों पर भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश राज्यों को दिया है। इसके लिए स्कूलों में मिड डे मील बनाने वाले ठेकेदारों की मदद लेने के लिए कहा है।
हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को ये निर्देश बिना देरी के लागू करने का निर्देश दिया है। दिल्ली सरकार से पूछा है कि सरकार इन निर्देशों को कैसे लागू करेगी। हाईकोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि दिल्ली सरकार ने 26 अप्रैल तक लॉकडाउन लगा दिया है। हाईकोर्ट इस मामले की मंगलवार को भी सुनवाई करेगी।