दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 वर्ष के उस व्यक्ति की मौत मामले की 'घटिया जांच' के लिए शुक्रवार को पुलिस की खिंचाई की जिसे पिछले साल 18 मार्च को यहां इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ऑस्ट्रेलिया से आने पर हिरासत में लिया गया था। उक्त युवक सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के कुछ ही मिनट बाद अस्पताल की छत से कथित तौर पर कूद गया था जिससे उसकी मौत हो गई थी।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने अस्पताल को भी इसके लिए फटकार लगाई कि युवक को पृथकवास वार्ड में ले जाए जाने के बाद वहां किसी की निगरानी के बगैर अकेले ही छोड़ दिया गया था। युवक के कोविड-19 से संक्रमित होने का संदेह था।
न्यायमूर्ति पल्ली ने कहा कि आपके (अस्पताल) लिए यह स्पष्टीकरण देना जरूरी है कि क्या हुआ, वह कैसे भाग गया? सिर्फ इसलिए कि यह एक सरकारी अस्पताल है, आप लोगों को बिना किसी की देखरेख के अकेले नहीं छोड़ सकते। आप लोगों को भर्ती क्यों कर रहे हैं, जब आप उन्हें कहीं भी जाने की अनुमति दे रहे हैं?
न्यायमूर्ति पल्ली ने कहा कि किसी न किसी प्रकार की देखभाल होनी चाहिए या आप लोगों को इमारत से कूदने के लिए छोड़ देते हैं। क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं है? मैं आपके इस दावे से संतुष्ट नहीं हूं कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई।
अदालत ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया, जिसमें उल्लेख हो कि युवक तनवीर सिंह को पृथकवास वार्ड में कब ले जाया गया था, क्या उसके साथ कोई कर्मचारी था, क्या वार्ड में कोई कर्मचारी मौजूद था और क्या वहां कोई अन्य मरीज थे।
अदालत ने निर्देश दिया कि पुलिस तीन सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करे। इस मामले में अब सात जुलाई को अगली सुनवाई होगी। अदालत ने कहा कि फिलहाल वह पुलिस को कोई निर्देश नहीं दे रही है क्योंकि वह पहले अस्पताल की रिपोर्ट का इंतजार करेगी।
इसके साथ ही अदालत ने पुलिस से यह भी कहा कि आपने इसमें खराब जांच किया है। अदालत ने परिवार के एक सदस्य द्वारा दायर याचिका पर यह निर्देश दिया। इसमें आरोप लगाया गया था कि युवक की मां, जो उसके साथ ही यात्रा कर रही थीं, उन्हें कोई कारण बताए बगैर ही उनके बेटे को हिरासत में लेने के बाद अस्पताल ले जाया गया था।