सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कोरोना काल में लोगों के पानी के बिल एक्यूमूलेट हो गए थे। दिल्ली में 27.6 लाख घरेलू उपभोक्ताओं हैं, जिसमें से 11.7 लाख पर एरियर्स हैं। इन सब को जोड़ा जाए तो 5,737 करोड़ के एरियर्स हैं। अगर हम सभी बिलों को ठीक करने की कोशिश करते तो हमें 100 साल से ज्यादा का वक्त लग जाता।
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है तो लोगों ने सोचा की कुछ न कुछ तो सरकार लेकर आएगी। इसलिए हम वन टाइन सेटलमेंट योजना लेकर आए हैं। ये योजना पानी के बढ़े चढ़े बिलों को निपटाने के लिए लाई गई है। दो या दो से ज़्यादा ओके रीडिंग है तो दोनों का एवरेज ले लिया जाएगा। अगर 3 हैं, तो आउटलाइयर रीडिंग हटाकर एवरेज लेकर सब महीनों पर लागू कर देंगे। इसके लिए आस पड़ोस के लोगों की रीडिंग देखी जाएगी। उसके हिसाब से सेटलमेंट बिल तैयार किया जाएगा।
महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर केजरीवाल सरकार
वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की केजरीवाल सरकार महिला सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सचिवालय में हुई बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया। दिल्ली में स्मार्ट-स्ट्रीट लाइट योजना को सैद्धांतिक मंज़ूरी दी। ये योजना PWD की सभी सड़कों पर लागू की जाएगी। एक कंट्रोल रूम बनेगा। कोई लाइट खराब हुई तो अपने आप पता चल जाएगा और उसे तुरंत बदल दिया जाएगा।
बकाया बिलों को दो श्रेणी में बांटा
पहला जिन लोगों के दो या दो से ज्यादा मीटर रीडिंग सही है और दूसरा जिन लोगों की एक या शून्य सही रीडिंग है। लिहाजा, जिन लोगों के दो या दो से ज्यादा सही रीडिंग आई हैं तो मीटर रीडर ने उपभोक्ता के घर जाकर वास्तविक रीडिंग ली और उपभोक्ता संतुष्ट है। जिन उपभोक्ताओं के दो या दो से ज्यादा मीटर रीडिंग सही हैं, तो रीडिंग का औसत लिया जाएगा। वहीं, बहुत ज्यादा बढ़ी हुई रीडिंग को हटा दिया गया है।
मसलन, अगर किसी के 50, 75 और 200 की तीन रीडिंग हैं तो 75 रीडिंग बीच की हो गई। इसमें 200 वाली रीडिंग 75 से दोगुना से भी ज्यादा है। इस दशा में 200 वाली मीटर रीडिंग को हटा देंगे और माना जाएगा कि रीडिंग गलत ली गई है। हमारे पास जितनी भी सही रीडिंग होंगी, उसमें से गलत रीडिंग हटाने के बाद जो रीडिंग बचेंगी, उसका औसत लिया जाएगा। इसके बाद उपभोक्ता जितने महीने का बिल नहीं भरा होगा, उन सभी महीनों में औसत बिल को डाल देंगे और उसे हिसाब से बिल बनाकर भेजा जाएगा। दूसरी श्रेणी में जिन लोगों की कोई औसत मौजूद नहीं है तो उनके पडोसियों का बिल देखेंगे, क्योंकि उपभोक्ता जिस इलाके में रहता है और उसका 300, 100, 50, 25 गज के मकान है तो उस एरिया में उसी आकार के जितने घर हैं और उनकी मीटर रीडिंग का औसत निकाला जाएगा और उसी हिसाब से उस उपभोक्ता के पानी का बिल बना दिया जाएगा।