दिल्ली में पॉवर ओवर लोडिंग की समस्या से निजात के लिए यूटिलिटी स्केल स्टोरेज सिस्टम युक्त पॉवर ग्रिड लगाया जा रहा है। इस तरह से जेनरेटर सिस्टम की जगह बैट्री लगाया जा रहा है। रानीबाग स्थित देश का पहला यूटिलिटी स्केल स्टोरेज सिस्टम का दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने शनिवार को उद्घाटन किया।
इस मौके पर जैन ने कहा कि अगर बैट्री सिस्टम की लागत चार गुना कम हो जाए, तो इसका उपयोग बड़े पैमाने पर हो सकेगा और पूरी आपूर्ति प्रणाली मजबूत होगी। अगर हम सभी प्रयास करें, तो जेनरेटर सिस्टम को बैट्री सिस्टम में तब्दील किया जा सकता है।
देश का यह पहला बैट्री स्टोरेज सिस्टम शुरू किया जा रहा है। यह बहुत ही साधारण सिस्टम है। 10 से 15 साल तक चल सकता है। जब पीक लोड होता है, उस समय ट्रांसफॉर्मर ओवर लोड हो जाते हैं और ट्रांसफॉर्मर के जलने से पॉवर चली जाती है। यह साल में एक-डेढ़ महीने चलता है।
जून या जुलाई के महीने में इसकी शुरूआत होती है। जब पीक समय होगा, तब बैटरी पॉवर देगी और जब लो पावर की मांग होती, तब बैटरी चार्ज होती रहेगी। अगर चाहें तो इसको बाकी दिनों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रदूषण रहित लिथियम वाली बैट्री का उपयोग
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पहले जो बैट्री निकल वाली आती थीं, वो बहुत प्रदूषण फैलाती थीं। अब यह लिथियम युक्त बैटरी है, जो कम से कम 10 साल तक चलेगी। पहले यह बैट्री बहुत ज्यादा महंगी होती थी। अगर हम 4 घंटे का स्टोरेज मान कर चलें, तो 150 किलोवॉट है और अगर एक घंटे की स्टोरेज मान कर चलें तो 600 किलोवॉट है। इसकी कीमत लगभग एक करोड़ रुपए है। बैटरी लगाने वाली कंपनी से कहना चाहूंगा कि इसकी कीमत को चार गुना कम कर दिया जाए, तो और ज्यादा लगा लेंगे।
उन्होंने कहा कि अगर बैटरी सिस्टम की कीमत 3 गुना से 4 गुना तक कम हो जाए, तो इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा होगा और पूरा सप्लाई सिस्टम बहुत जबरदस्त हो जाएगा। दिल्ली में जेनरेटर अब चलते नहीं है, क्योंकि जब से केजरीवाल सरकार आई है, तब से दिल्ली में बिजली जाती ही नहीं है। फिर भी बैकअप के लिए जेनरेटर रखने पड़ते हैं। सभी जेनरेटर सिस्टम को इस बैट्री सिस्टम से तब्दील किया जा सकता है।
टाटा पॉवर के सीईओ गणेश श्रीनिवासन ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूशन के स्तर पर सप्लाई की विश्वसनीयता बढ़ेगी। दिल्ली जलबोर्ड, कॉमर्शिलय कॉम्प्लेक्स, असप्तालों समेत आपातकालीन सप्लाई अब उपलब्ध रहेगी। पीक लोड मैनेजमेंट में परेशानी नहीं होगी।