नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के मंत्री द्वारा आक्सीजन की कथित जमाखोरी करने व उसे लोगों में वितरित करने के आरोप को गंभीरता से लिया है। अदालत ने मामले में मंत्री इमरान हुसैन व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि मंत्री अपने स्तर पर ऑक्सीजन एकत्रित कर उसे लोगों में बांट रहे है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। कई गुरुद्वारे भी इसे (आक्सीजन) जरूरतमंदों में बांट रहे हैं। अदालत ने कहा कि यह देखना जरूरी है कि वे ऑक्सीजन कहां से ले रहे हैं। अदालत ने मंत्री इमरान हुसैन को फिलहाल शनिवार को होने वाली सुनवाई में उपस्थित करने व स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
खंडपीठ ने कहा कि हो सकता है हुसैन फरीदाबाद से आक्सीजन ला रहे हों। पीठ ने यह भी कहा है कि यदि वह दिल्ली को आवंटित श्रोत से आक्सीजन नहीं ले रहा हैं और अपने सिलिंडर का प्रबंध किया है तो आपको (याचिकाकर्ता) वास्तव में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने हुसैन द्वारा आक्सीजन वितरण का जिक्र करते हुए एक फेसबुक पोस्ट दिखाया और उन पर आक्सीजन की जमाखोरी करने का आरोप लगाया।
दिल्ली सरकार के अधिवक्ता राहुल मेहरा ने न्यायालय को बताया कि आक्सीजन, दवा या चिकित्सा उपकरण की जमाखोरी और कालाबाजारी करने में दोषी पाए गए सभी लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जमाखोरी करने वाला कोई भी हो, चाहे वह भाजपा सांसद गौतम गंभीर हों या आप विधायक इमरान हुसैन, जमाखोरी में दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने भी ट्वीट कर कहा था कि कोरोना संक्रमण के इलाज में व्यापक तौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं उनके कार्यालयों में उपलब्ध हैं और जरूरतमंद लोग वहां से ले सकते हैं। गंभीर ने यह भी ट्वीट किया था कि उन्होंने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स की व्यवस्था की है और जरूरतमंद लोग इसे ले सकते हैं।