नई दिल्ली। दिल्ली सरकार व कई अन्य छात्रों ने गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को वार्षिक व विकास शुल्क वसूलने की अनुमति के फैसले को चुनौती दी है। सरकार व छात्रों ने तर्क रखा है कि हाईकोर्ट के सिंगल जज का फैसला कानून के खिलाफ व अधूरे तथ्यों पर आधारित है। याचिका पर सोमवार को सुनवाई संभव है।
न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने अपने 31 मई के फैसले में गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को बच्चों से वार्षिक और विकास शुल्क लेने की अनुमति प्रदान कर दी थी। अदालत ने दिल्ली सरकार द्वारा 18 अप्रैल 20 व 28 अगस्त 20 को जारी उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें कोरोना महामारी के दौरान स्कूलों द्वारा वार्षिक शुल्क और विकास शुल्क लेने को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया था।
अदालत ने कहा कि स्कूल बंद रहें या खुले, उन्हें कुछ मदों में खर्च करना ही पड़ता है। दिल्ली सरकार ने चुनौती याचिका में कहा कि पिछले साल अप्रैल और अगस्त के आदेश व्यापक जनहित में जारी किए गए थे क्योंकि लॉकडाउन के कारण लोग वित्तीय संकट में थे। सरकार ने कहा फीस वसूलना आय बढ़ाने का एकमात्र जरिया नहीं है। इसलिए इसके विपरीत कोई भी टिप्पणी न केवल निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के हित के लिए प्रतिकूल होगी, बल्कि उसे लागू करना मुश्किल होगा।
अदालत ने कहा था कि शिक्षा निदेशालय केपास निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के फीस ढांचे में हस्तक्षेप करने का तब तक कोई अधिकार नहीं, जब तक यह साबित न हो जाए कि वह मुनाफाखोरी कर रहे हैं।
अदालत ने वार्षिक शुल्क व विकास शुल्क के संबंध में खर्चों की पेश सूची का अध्ययन करते हुए कहा कि इससे स्पष्ट है कि वे खर्च करते रहते हैं और इसका स्कूलों के भौतिक रूप से रूप से खुलने या बंद होने से कोई संबंध नहीं है। अदालत ने कहा कि सभी स्कूल पूरे शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए वार्षिक और विकास शुल्क वसूलने के हकदार होंगे।
सरकार ने कहा जब स्कूल, यदि अनियमित हैं यानि बंद हैं तो फीस स्ट्रक्चर तय करना उसकी सनक व शौक ही माना जा सकता है। ऐसे में उसकी जिम्मेदारी है कि फीस के अलावा किसी अन्य शुल्क न वसूले।
वहीं छात्रों ने अपनी अपील में कहा कि जब स्कूल ही बंद हैं तो भवनों की मरम्मत, प्रशासनिक खर्च, किराया और हॉस्टल खर्च लागू नहीं होते। उन्होंने तर्क दिया कि वार्षिक और विकास शुल्क को मात्र स्थगित किया गया था और लेने से रोका नहीं गया था। महामारी की स्थिति सामान्य होने के बाद स्कूल इस मद में शुल्क ले सकते हैं।
सरकार व छात्रों ने सिंगल जज द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के जोधपुर स्कूल बनाम राजस्थान सरकार के हवाले पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा यह फैसला दिल्ली में लागू नहीं होता क्योंकि शिक्षा कानून दोनों राज्यों में अलग हैं।
सिंगल जज ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि स्कूल लॉकडाउन की अवधि में शुल्क पर 15 प्रतिशत की छूट प्रदान करेंगे। इसके अलावा स्कूल उक्त शुल्क 10 जून से छह किश्तों में अभिभावकों से वसूलेंगे। अदालत ने यह निर्णय निजी स्कूलों की एक्शन कमेटी की याचिका पर दिया था।