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दिल्ली चुनाव में घर फूंक कर तमाशा नहीं देखेगी भाजपा, मुस्लिम और शाहीन बाग से बनेगी बात!

Fri, 07 Feb 2020 06:48 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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shaheen bagh Protest - फोटो : Social Media
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2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक बात तो तय है कि इस दफा भाजपा, घर फूंक कर तमाशा नहीं देखेगी। मुस्लिम और शाहीन बाग से बनेगी बात, भाजपा को इसका पूरा भरोसा है। पार्टी ने दिल्ली चुनाव के लिए जो चक्रव्यूह रचा है, उसमें केवल मुस्लिम और शाहीन बाग ही नहीं हैं, यहां आम आदमी पार्टी भी उसी का एक हिस्सा है।

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भाजपा की रणनीति ने इस बार आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को काफी हद तक मुश्किल में डाला है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि दिल्ली में दर्जनभर शाहीन बाग जैसे प्रदर्शन चलना और चुनाव प्रचार के बीच केजरीवाल का यह कहना, लोगों को ऐसे प्रदर्शनों की वजह से परेशानी हो रही है, लिहाजा इन्हें हटा देना चाहिए, उसे भाजपा अपनी कामयाबी मानती है।

दूसरी ओर, कांग्रेस का इस प्रदर्शन को सीधा समर्थन देना, इन सबका भाजपा को फायदा दिला सकता है। मुस्लिम, आप से छिटक कर कांग्रेस की ओर जा सकता है। अगर ये हो जाता है तो भाजपा की बात बन सकती है।
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दिल्ली चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने पहले दिन जो रणनीति बनाई थी, आखिरी दिन तक वह उसी पर टिकी रही। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले यह कह दिया कि भाजपा को 45 सीट मिल सकती हैं। दूसरी तरफ, आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को कई बार अपनी चुनावी रणनीति बदलनी पड़ी। पहले उन्हें लगा कि इस बार आसानी से भारी जीत मिल जाएगी।

जब केजरीवाल की जनसभाओं और रोड शो का खाका खींचा जा रहा था तो उक्त तथ्यों को ध्यान में रखकर चुनाव कार्यक्रम तय किया गया। उनके लिए 34 रोड शो रखे गए, 15 जनसभाओं और 13 टाउन हाल सभाओं की तैयारी की गई। पिछले विधानसभा चुनाव में आप संयोजक का कार्यक्रम देखें, तो उन्होंने 110 जनसभाओं को संबोधित किया था।

इसके अलावा फंड जुटाने की खातिर 30 लंच एवं डिनर भी आयोजित किए गए। अनेक रोड शो भी रहे। साथ ही 272 वार्डों में प्रोजेक्टर लगाकर केजरीवाल से लोगों को रुबरु कराया गया। इतना ही नहीं, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, आशुतोष, आनंद कुमार, आशीष खेतान और कुमार विश्वास जैसे कई लोगों ने छोटी मोटी जनसभाएं कर आप के लिए वोट मांगे। इनकी संख्या 500 से ज्यादा बताई गई थी।

इस बार केजरीवाल ने चुनावों की घोषणा होने से पहले ही यह तय कर लिया था कि दिल्ली के विकास मॉडल पर चुनाव लड़ा जाएगा।

केजरीवाल को बदलनी पड़ी रणनीति

सीएए को लेकर शाहीन बाग का प्रदर्शन आगे बढ़ रहा था। कोई नहीं जानता था कि यह प्रदर्शन ही चुनाव का अहम मुद्दा बन जाएगा। अमित शाह, दिल्ली चुनाव का एजेंडा तय कर चुके थे। उन्होंने पहले दिन से ही सीएए, शाहीन बाग, मुस्लिम, अनुच्छेद 370 और राम मंदिर पर लोगों से बात करनी शुरू कर दी।

दो-चार दिन में शाहीन बाग को लेकर भाजपा के दूसरे नेताओं ने भी तीखे बयान देना चालू कर दिया। स्वराज इंडिया के दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष अनुपम बताते हैं, देखिए भाजपा कहीं न कहीं अपनी रणनीति में कामयाब होती दिख रही है। पहले केजरीवाल निश्चिंत थे, लेकिन चुनाव प्रचार खत्म होने के दिन उनकी चिंता काफी बढ़ चुकी थी।

भाजपा ने जो चक्रव्यूह तैयार किया, उसमें आप फंस चुकी थी। भाजपा लोगों को यह बताने में कामयाब रही कि दिल्ली में शाहीन बाग और दूसरी जगह पर जो विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, उनके पीछे आम आदमी पार्टी का हाथ है। यह बात उस वक्त सही दिखी जब केजरीवाल को कहना पड़ा कि अमित शाह के हाथ में पावर है, वे चाहें तो इस प्रदर्शन को तुरंत खत्म करवा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मुझे पुलिस दे दो, मैं दो घंटे में शाहीन बाग वाली सड़क खाली करा दूंगा। इसके बाद लोगों के दिमाग में यह बात बैठा दी गई कि देखा हम सही कह रहे थे, शाहीन बाग के प्रदर्शन को आप का समर्थन हासिल है।

बतौर अनुपम, इसके बाद मुस्लिम समुदाय का एक तबका यह सोचने पर मजबूर हो गया कि केजरीवाल का सीएए को लेकर स्टैंड क्लीयर नहीं है। यही वजह है कि बहुत से मुस्लिम फिर से कांग्रेस की तरफ जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है कि यह भाजपा की रणनीतिक जीत होगी, क्योंकि इसका राजनीतिक फायदा उसे मिलेगा।

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