बता दें कि शाहीन बाग में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर भाजपा का शुरू से लेकर अब तक एक जैसा स्टैंड रहा है। दिल्ली में मुसलमानों के लगभग 13 फीसदी वोट हैं। पार्टी नेताओं की सोच है कि शाहीन बाग का प्रदर्शन उसे चुनाव में फायदा दिला सकता है। पिछले चुनाव में अधिकांश मुस्लिम वोटरों ने आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था। हालांकि इससे पहले मुस्लिम समुदाय को कांग्रेस पार्टी का वोटबैंक माना जाता रहा है।
'आप' को यह मालूम है कि दिल्ली में मुसलमान अगर कांग्रेस की ओर जाते हैं, तो पार्टी को इसका नुकसान होगा। मुस्लिम वोट का कांग्रेस की तरफ जाना या उसमें विभाजन होना, ऐसी स्थिति में भाजपा को फायदा पहुंच सकता है। कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिमों को अपने साथ जोड़ने के लिए प्रयास शुरू कर दिया है। दिल्ली कांग्रेस के अलावा राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और दूसरे बड़े नेता भी कहीं न कहीं शाहीन बाग का समर्थन करते हुए दिख रहे हैं।
दो तीन दिन पहले तक आम आदमी पार्टी शाहीन बाग पर कुछ भी नहीं बोल रही थी, लेकिन भाजपा ने जब से इस प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया है तो आप को भी शाहीन बाग का खेल समझ आने लगा। यही वजह है कि पार्टी नेताओं को इस मसले पर अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी। पहले मनीष सिसोदिया ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों के शाहीन बाग को खाली कराना उनकी सरकार का काम नहीं है।
कालिंदी कुंज मार्ग का उद्घाटन उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। अब वे कह रहे हैं कि वह शाहीन बाग के लोगों के साथ खड़े हैं। शाहीन बाग को लेकर आम आदमी पार्टी का यह स्टैंड अब पार्टी की चुनावी रणनीति में बदलाव का संकेत दे रहा है।