भाजपा उपाध्यक्ष और दिल्ली भाजपा प्रभारी श्याम जाजू दिल्ली प्रदेश के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। चुनाव में कई नेताओं के बोल बिगड़ चुके हैं और चुनाव आयोग ने कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर पर कार्रवाई भी कर दी है। बिजली पानी के मुद्दे से शुरू हुआ चुनाव अब शाहीन बाग के मुद्दे पर आ चुका है। ऐसे में भाजपा क्या सोच रही है, यह जानने के लिए हमारे विशेष संवाददाता अमित शर्मा ने श्याम जाजू से मुलाकात की और कई अहम मुद्दे पर उनसे बातचीत की। प्रस्तुत है वार्ता के प्रमुख अंश-
क्या इस बात से कोई इंकार कर सकता है कि केंद्र ने दिल्ली के लिए बेहद अहम काम किया है? ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे, वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे, स्मॉग टॉवर, लोगों को कच्चे मकानों को पक्की रजिस्ट्री जैसे अनेक काम हैं, जिसने दिल्ली के लोगों की जिंदगी बदली है। जहां तक शाहीन बाग के मुद्दे की बात है, तो मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि शाहीन बाग पर जाकर कौन बैठा है? अगर कानून से किसी की नागरिकता नहीं जा रही है तो इस आंदोलन का औचित्य क्या है?
मेरा जवाब एक ही है। क्या इस कानून से भारत के एक भी मुसलमान की नागरिकता या उसके हितों को चोट पहुंचती है? अगर नहीं, तो ये आंदोलन क्यों किया जा रहा है? पूरा देश देख रहा है कि यह आंदोलन विपक्ष के कुछ दलों को आगे बढ़ाने का साधन बना हुआ है। यही कारण है कि इस आंदोलन के प्रति स्थानीय लोगों के मन में गुस्सा है और वे इसका विरोध कर रहे हैं?
अरविंद केजरीवाल के पास केवल एक सांसद ही है, तो वह ही प्रचार कर रहा है। अगर हमारे पास 300 से ज्यादा सांसद हैं, सभी इस लोकतंत्र के उत्सव में भागीदारी करना चाहते हैं, तो इसमें बुराई क्या है? सही बात यह है कि जो पार्टी जनता से जुड़ी रहती है वही जिंदा रहती है। चुनाव लोगों से जुड़ने का सबसे बेहतर मौका होता है। कांग्रेस और वामपंथी दल लोगों से कट गए तो वे खात्मे के कगार पर आ गए। मेरा मानना है कि हर नेता को लोकतंत्र के इस उत्सव में भागीदारी करनी चाहिए।
देखिए, इस लोकसभा चुनाव में दुबारा पूर्ण बहुमत पाने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने वे सभी काम किये हैं, जिनके लिए पार्टी बनी थी, जिनके लिए हम जिए थे, जिसके लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर अनेक लोगों ने अपनी जान गंवाई। अनुच्छेद 370, तीन तलाक और राममंदिर इन्हीं मुद्दों में से एक हैं। हम केवल अपने काम जनता तक पहुंचा रहे हैं।
मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह इन मुद्दों पर जनमत सर्वेश्रण है। मैं यह कह रहा हूं कि चुनाव भी एक अवसर होता है जब कोई दल अपने कामों को जनता तक पहुंचाता है। बाकी दिल्ली प्रदेश का चुनाव हो या किसी अन्य प्रदेश का, वह हमेशा अनेक स्थानीय मुद्दों से प्रभावित होता है और मुझे पूरा विश्वास है कि 2015 के बाद कोई भी चुनाव न जीत पाने वाले अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी का पूरी तरह खात्मा हो जाएगा। इस चुनाव के बाद विपक्ष को जनता के मन की बात पता चल जाएगी।