दिल्ली में विधानसभा चुनाव की वोटिंग के बाद सामने आए एग्जिट पोल के नतीजों में आम आदमी पार्टी बाजी मार रही है। हालांकि इसकी सही तस्वीर मंगलवार को देखने को मिलेगी, जब वोटों की गिनती शुरू होगी। चुनाव में अपने विरोधियों को हराने के लिए अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने खास प्लान तैयार किया था। इसके लिए 'आप' के तीन 'वार रूम' बनाए गए। यहीं पर दिल्ली फतह करने की हर छोटी बड़ी रणनीति बनाई गई।
इस चुनाव में आम आदमी पार्टी के एकमात्र स्टार प्रचारक अरविंद केजरीवाल थे, जबकि विरोधी खेमे में मोदी-शाह से लेकर अनेक केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्रियों की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त थी। केजरीवाल एक दिन में मुश्किल से दो तीन जगहों पर ही प्रचार के लिए निकलते थे।
चुनाव प्रचार की रणनीति हालांकि तीनों वार रूम्स में ही तैयार हुई है। केजरीवाल के आवास पर जो वार रूम बना था, उसमें करीब 11 कार्यकर्ता काम कर रहे थे। इनमें चार-पांच कार्यकर्ता तो वही थे, जो अन्ना आंदोलन के समय से ही केजरीवाल के साथ काम करते रहे हैं। पार्टी के सभी कार्यक्रम डीडीयू मार्ग स्थित आप दफ्तर से जारी होते थे। अगर उनमें कोई बदलाव करना होता, तो उसके लिए केजरीवाल के आवास पर बने वार रूम की सहमति ली जाती थी।
चुनाव प्रचार से जुड़े कार्यक्रमों की रूपरेखा रात 11 बजे के बाद ही तय होती है। सुबह नौ बजे से 11 बजे तक चुनाव प्रचार की रिपोर्ट का विश्लेषण होता है। खुद केजरीवाल इस रिपोर्ट का आंकलन करते रहे हैं। इसके बाद जिस किसी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के कार्यक्रम जैसे जनसभा, रैली, पदयात्रा और रोड शो, की तैयार कौन करेगा, यह जिम्मेदारी बांट दी जाती है। पदाधिकारियों के मोबाइल फोन पर मैसेज चला जाता है।
मंच संचालन कौन करेगा, कुर्सियां, माइक, स्थानीय नेताओं में से कौन मंच पर बैठेगा, ये सभी सूचनाएं सेंट्रल वार रूम से विधानसभा वार रूम को भेजी जाती हैं। बाद में शाम को सभी वालेंटियर्स से ई-मेल के जरिए प्रचार की स्टेट्स रिपोर्ट ली जाती है। दूसरी पार्टियों के नेताओं की तरफ से पेश की जाने वाली मदद को लेकर केंद्रीय वार रूम से इजाजत लेनी पड़ती है। इसमें यह देखा जाता है कि वह नेता आप की टोह लेने का कोई प्रपंच तो नहीं रच रहा है।
चूंकि आपके पास केजरीवाल के अलावा दूसरा स्टार प्रचारक नहीं था, इसलिए उनके रोड शो और जनसभाओं का कार्यक्रम तीनों वार रूम्स की रिपोर्ट के आधार पर किया गया। भाजपा के पास हैवी वेट स्टार प्रचारक थे, उनका मुकाबला करने के लिए आप ने विशेष चुनावी प्रबंधन की रणनीति अपनाई। इसमें तीन बड़े इंटरनल सर्वे भी शामिल थे। ये सर्वे दिल्ली चुनाव की वोटिंग से पहले एक-एक माह के अंतराल पर किए गए।
आप कार्यकर्ताओं ने लोगों के घर पहुंचकर सर्वे रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट का नतीजा यह रहा कि कोई भी दल आप के मुकाबले में कहीं नहीं ठहर रहा था। इसके बाद चुनाव में छाए शाहीन बाग मुद्दे का आप ने बारीकि से विश्लेषण किया था। भाजपा के स्टार प्रचारकों के रोड शो एवं जनसभाओं में आप की खुफिया विंग के सदस्य मौजूद रहे।
इसका मकसद यह पता लगाना था कि वहां पर भाजपा कार्यकर्ताओं को छोड़कर आमजन की कितनी भागीदारी थी। रोड शो से पहले और उसके खत्म होने के बाद आप कार्यकर्ता वहां मौजूद लोगों का रूझान पता करते थे।
पार्टी ने इसी तरह मोदी शाह से लेकर भाजपा के तमाम स्टार प्रचारकों की चुनावी जनसभाओं का सर्वे किया। दोनों रिपोर्ट्स में सामने आया कि वहां आम लोगों की खुद से कोई सहभागिता नहीं थी। जो कुछ नजर आया, वह बहुत हद तक प्रबंधन का नतीजा रहा है।
इसके बाद केजरीवाल को यकीन हो गया था कि विरोधी पार्टियों का प्रचार, सिवाए दिखावे के कुछ नहीं था, जमीन पर उसका असर नहीं था। सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं का लगातार अपडेट लिया जा रहा था। हनुमान को लेकर भाजपा और आप के बीच जो बयानबाजी हुई, आप के वार रूम में यह सूचना आ गई थी कि यह अपनी पार्टी के पक्ष में जा रहा है।