यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि नीट पीजी काउंसलिंग को लेकर बार बार आश्वासन दिए जा रहे हैं लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। इसलिए काउंसलिंग का समय निर्धारित होने तक उनका प्रदर्शन ऐसे ही जारी रहेगा। वहीं फोर्डा के अध्यक्ष डॉ. मनीष का कहना है कि सरकार ने एक सप्ताह के लिए समय मांगा था। इसलिए हड़ताल को सात दिन के लिए स्थगित किया गया है। अगर इस बीच कांउसलिंग की तारीख घोषित नहीं होती है तो उसके बाद सभी अस्पताल पूरी तरह से बंद हो सकते हैं। कोई भी रेजिडेंट डॉक्टर कोरोना वार्ड सहित किसी भी स्वास्थ्य सेवा में उपस्थित नहीं रहेगा।
कहीं नर्स तो कहीं वरिष्ठ डॉक्टर संभाल रहे कमान
रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल का असर लगभग सभी अस्पतालों में है। चूंकि ओपीडी इत्यादि जगहों पर पूरा कार्यभार इन्हीं डॉक्टरों पर रहता है, ऐसे में हड़ताल की वजह से कहीं नर्स मरीजों को देख रही हैं तो कहीं-कहीं वरिष्ठ डॉक्टर कुछ मरीजों को संभाल रहे हैं। लोकनायक अस्पताल की एक नर्स ने बताया कि ज्यादातर मरीजों को फॉलोअप के लिए रखा जा रहा है। करीब 60 फीसदी मरीज ऐसे हैं जिनकी दवाएं आगे बढ़ाया जा सकता है। इसलिए उन्हें हड़ताल खत्म होने तक दवाएं लेने और बाद में आकर नियमित जांच इत्यादि कराने की सलाह दे रहे हैं।