हाईकोर्ट ने सीयूईटी के बजाय सीएलएटी के माध्यम से पांच वर्षीय कानून पाठ्यक्रमों में प्रवेश के दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के फैसले पर सवाल उठाया। इसके बाद डीयू ने कहा, वह इस पाठ्यक्रम के लिए 25 अगस्त तक आवेदन नहीं मांगेगा।
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मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा व न्यायमूर्ति संजीव नरूला की खंडपीठ ने इस मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, आप विशेष नहीं। यह राष्ट्रीय नीति है। यदि 18 अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश के लिए सीयूईटी स्कोर अपना रहे हैं, तो डीयू ऐसा क्यों नहीं कर रहा।
इस पर डीयू ने कोर्ट को बताया कि मुद्दे पर विचार के लिए गठित एक विशेष समिति ने इसका सुझाव दिया है। उन्होंने कोर्ट से मामले में जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय देने की मांग की। इसके बाद पीठ ने मामले की सुनवाई 25 अगस्त तक स्थगित कर दी। पीठ ने स्पष्ट किया कि अगर अगली तारीख तक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो अंतरिम राहत देने के मुद्दे पर मामले की सुनवाई की जाएगी।