दिल्ली की एक अदालत ने उमर खालिद और ताहिर हुसैन सहित 18 आरोपियों के अपराधों का संज्ञान लिया है। इन पर देशद्रोह, धर्म के आधार पर दंगा भड़काने, समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। न्यायालय ने इन सभी आरोपियों के अपराधों का संज्ञान लिया है।
वहीं इससे पहले अदालत ने कहा था कि यह प्रदर्शित करने के लिए प्रथम दृष्टया उपयुक्त आधार हैं कि जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद, आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य ने पिछले वर्ष उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान षड्यंत्र रचे थे।
अदालत ने मामले में पूरक आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की थी। मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार ने कहा था कि पिछले वर्ष फरवरी में खजूरी खास इलाके में सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े मामले में खालिद के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है।
अदालत ने कहा कि एक गवाह का बयान यह प्रदर्शित करने के लिए पर्याप्त है कि उस वक्त खालिद, ताहिर हुसैन के संपर्क में था। हुसैन पर मुख्य षड्यंत्रकारी होने का आरोप है जिसने दंगे भड़काए और लोगों से लूटपाट करने तथा संपत्तियों को जलाने के लिए भीड़ को उकसाया।
अदालत ने कहा था कि अभियोजन ने आरोपपत्र में आरोप लगाया कि दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे भड़काने के आपराधिक षड्यंत्र में खालिद ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी व्यक्तियों द्वारा भीड़ को उकसाने के कारण लोगों के साथ लूटपाट की घटना हुई और घरों एवं दुकानों सहित संपत्तियों को जलाया गया। उन्होंने सार्वजनिक संपत्ति को भी नष्ट किया।