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दिल्ली की अदालत ने कहा-  जेल में कैदी कोर्ट की हिरासत में, अधिकारी उनके प्रतिनिधि..

Sun, 27 Jun 2021 06:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • अदालत ने कहा कि जेल अधिकारी मारपीट करते हैं तो समझा जाएगा कि अदालत करवा रही 
  • एक कैदी की मारपीट याचिका पर अदालत ने की कड़ी टिप्पणियां
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल में एक कैदी की पिटाई को गंभीरता से लिया है। अदालत ने कहा कि देशभर की जेलों के अंदर हिंसा की घटनाओं की वजह से आरोपी भारत में प्रत्यर्पण किए जाने का विरोध कर रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जेल अधिकारी कैदियों की पिटाई करते हैं तो यह संदेश जाता है कि अदालत कैदियों की पिटाई करवा रही है, क्योंकि जेल अधिकारी अदालत के प्रतिनिधि होते हैं। कैदी न्यायिक हिरासत में होते है।

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न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी एवं न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने उक्त टिप्पणी एक आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए की जिसने कहा था कि तिहाड़ जेल के अंदर उसका उत्पीड़न किया जा रहा है। खंडपीठ ने जेल महानिदेशक को कैदी की शिकायत को पांच कार्य दिवसों के भीतर निपटाने का निर्देश देते हुए उसे तिहाड़ जेल परिसर से दिल्ली की किसी अन्य जेल में स्थानांतरित करने की संभावना पर निर्णय लेने का भी निर्देश दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई 5 जुलाई तय की है। 

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान विभिन्न मामलों में फरार आरोपियों के प्रत्यर्पण मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हमें कारागार विभाग को यह समझाते हुए दुख हो रहा है कि ऐसे मामलों के कारण ही फरार आरोपी हमारे देश में प्रत्यर्पण से बच रहे हैं। वे संबंधित देश की अदालत में शरण मांगते हुए तर्क देते है कि भारतीय जेलों में यही होता है। लोग मारपीट करते हैं। मुझे वहां मत भेजो।
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तिहाड़ जेल की और से पेश वकील संजय लॉ ने कहा कि अमेरिकी जेलों में इससे बदतर हो रहा है, तो पीठ ने पूछा कि तो क्या हम किसी अन्य देश के साथ दौड़ में हैं? क्या हमें अन्य कैदियों की जान नहीं बचानी चाहिए? एकमात्र सवाल यह है कि क्या सुरक्षा बल का अधिक प्रयोग किया गया है या नहीं?

अदालत ने कहा कि यही एक समस्या है कि जेल प्रशासन यह मानने को तैयार नहीं कि वह कैदियों की पिटाई कर कुछ गलत कर रहा है। अदालत ने कहा एक जेल परिसर अदालतों और जजों का बैकरूम है। यदि आप किसी को मेरे चेंबर में ले जाकर पीटेंगे तो क्या मैं उसके पक्ष में खड़ा होऊंगा या नहीं? यह आदमी हमारी हिरासत में है, अदालत की हिरासत में है। आप हमारे प्रतिनिधि हैं यदि आप उसे पीटते हैं, तो इसका मतलब है कि हमने उसे पीटा।

कोर्ट ने आगे कहा कि वह इस विचार से सहमत नहीं हो सकते कि जेल अधिकारी कैदियों की पिटाई कर सकते हैं। कोर्ट ने जेल प्रशासन से कहा कि आपको अधिक सतर्क रहना होगा। आपको यह देखना होगा कि इस तरह की घटनाएं न हों। आप हमें कैसे बता सकते हैं कि आप कैदियों की पिटाई कर रहे हैं और हमें इसमें भागीदार होना चाहिए। अधिवक्ता संजय लॉ ने कहा कि बचाव पक्ष के वकील अपने मुवक्किलों को संत और जेल अधिकारियों को अपराधी के रूप में पेश कर रहे हैं।

खंडपीठ एक कैदी की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसने तिहाड़ जेल से स्थानांतरण की मांग की गई है। याचिका में जेल के अंदर जेल अधिकारियों के हाथों हिंसा और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। याचिका के जवाब में जेल अधिकारियों ने तर्क दिया है कि कैदी उस जेल में स्थानांतरित होना चाहता है जहां उसके दोस्तों और सहयोगियों को पीड़ित होने के झूठे बहाने पर रखा गया है। कैदी फिलहाल तिहाड़ जेल के विशेष सुरक्षा वार्ड में है।

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