रविवार शाम को शहर में 24 घंटे का औसत एक्यूआई 259 दर्ज किया गया, जो दिवाली से एक दिन पहले सात साल में सबसे कम था। तापमान में गिरावट और हवा की गति के बीच रात में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया क्योंकि लोगों ने राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में पटाखे चलाए हैं। रविवार को बीते 24 घंटे में उत्तरी भारत में 850 जगहों पर पराली जलने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। वहीं सोमवार को बढ़कर 1318 घटनाएं रिकॉर्ड की गई, जो इस मौसम में अब तक का सबसे अधिक है।
हवा की मध्यम गति और ताजा परिस्थितियों के कारण दिन के दौरान हवा की गुणवत्ता की स्थिति काफी हद तक स्थिर रही। हालांकि, कम तापमान और बंद हवाएं व रात में पटाखों से निकलने वाले प्रदूषण के कारण मंगलवार की सुबह तक हवा की गुणवत्ता "बहुत खराब" श्रेणी या यहां तक कि "गंभीर" क्षेत्र में जा सकता है।
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक पूर्वानुमान एजेंसी सफर ने पहले भविष्यवाणी की थी कि बंद हवाओं और कम तापमान के कारण सोमवार सुबह (दिवाली) हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' हो सकती है, जो हवा में प्रदूषकों के तेजी से संचय की अनुमति देती है।
यदि पिछले साल की तरह पटाखे जलते हैं तो दिवाली की रात में ही हवा की गुणवत्ता 'गंभीर' स्तर तक गिर सकती है। एक और दिन के लिए 'रेड' ज़ोन में बनी रह सकती है।