कोरोना वायरस को लेकर देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स ने चार दर्जन से ज्यादा अध्ययन शुरू कर दिए हैं। इसके लिए एम्स प्रबंधन ने बाकायदा एक टास्क फोर्स गठित की है, जिसकी निगरानी में शोध किए जा रहे हैं। इनमें एम्स के डॉक्टरों के अलावा इंजीनियर और नैनोटेक्नोलॉजी विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि एम्स में 49 रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं। निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कोरोना वायरस से संबंधित अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और सुविधाजनक बनाने के लिए डीन (अनुसंधान) के नेतृत्व में टास्क फोर्स का गठन किया है।
डॉ. गुलेरिया ने बताया कि कोरोना वायरस को लेकर अध्ययनों को काफी समय पहले मंजूरी दी जा चुकी है। सभी विभागों के विशेषज्ञ इसमें जुट गए हैं। इन अध्ययन के परिणाम इंडियन मेडिकल रिसर्च जर्नल में भी प्रकाशित किए जाएंगे।
दरअसल, एम्स के प्रसूति विभाग की ओर से हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में अध्ययन प्रकाशित किया है, जिसमें कोरोना संक्रमित गर्भवती महिला की सफल प्रसूति कराने, स्तनपान और नवजात शिशु के कोरोना निगेटिव मिलने की जानकारी दी गई है। एम्स में अब तक कोरोना संक्रमित दो महिलाओं की प्रसूति कराई जा चुकी है। दोनों ने ही स्वस्थ शिशुओं को जन्म दिया है।