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'आप' का आरोप: दुर्गेश पाठक बोले- एमसीडी ने कूड़ा उठाने के नाम पर किया 84 करोड़ का घोटाला, भाजपा ने किया पलटवार

Sun, 25 Sep 2022 03:37 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

आम आदमी पार्टी और भाजपा में आरोप- प्रत्यारोप का दौर जारी है। आप विधायक ने भाजपा शासित एमसीडी पर 84 करोड़ को घोटाले का आरोप लगाया है। दुर्गेश पाठक ने कहा कि जब 400 रुपए प्रति मीट्रिक टन का टेंडर संभव था तो भाजपा ने पहले 3250 रुपए प्रति मीट्रिक टन का टेंडर क्यों दिया? मैं पूरे मामले की जांच की मांग करता हूं।
 
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आप प्रवक्ता दुर्गेश पाठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी ने एमसीडी पर कूड़ा उठाने के नाम पर 84 करोड़ रुपये भ्रष्टाचार करने का आरोप  लगाया है। आम आदमी पार्टी के विधायक दुर्गेश पाठक  ने कहा कि भलस्वा के कूड़े के पहाड़ से कूड़ा उठाने के लिए यह गबन किया गया। इस मामले की जांच होनी चाहिए क्योंकि बिना भाजपा नेताओं की भागीदारी के इतना बड़ा भ्रष्टाचार संभव नहीं है।

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दुर्गेश पाठक ने कहा कि कूड़ा उठाने के लिए भाजपा ने फरवरी 2020 में एक कंपनी को 3,250 रुपए प्रति मीट्रिक टन का टेंडर दिया था। नियम के अनुसार ट्रकों में जीपीएस लगाना था लेकिन कंपनी ने मना कर दिया। इसके बाद टेंडर रद्द कर दिया गया। बाद में एक नई कंपनी को मात्र 400 रुपए प्रति मीट्रिक टन का टेंडर दिया गया। तब तक पुरानी कंपनी तीन लाख मीट्रिक टन कूड़ा प्रॉसेस कर चुकी थी। 

जिसके अनुसार 84 करोड़ का घोटाला हुआ है। पाठक ने पूछा कि जब 400 रुपए प्रति मीट्रिक टन का टेंडर कूड़ा उठाने के लिए संभव था तो 3250 रुपए प्रति मीट्रिक टन का टेंडर क्यों दिया। पाठक ने पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि दस्तावेज के हवाले से यह भ्रष्टाचार उजागर हुआ है।
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पाठक के आरोप पर भाजपा का पलटवार
भाजपा ने दुर्गेश पाठक के आरोप को खारिज कर दिया है। भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर पलटवार करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार के हर विभाग में पुख्ता सबूत के साथ घोटाला उजागर होने   से आम आदमी पार्टी अपना मानसिक संतुलन खो बैठी है।

प्रदेश भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि आप विधायक दुर्गेश पाठक हर बार एमसीडी पर आरोप लगाते हैं, लेकिन वह आरोप निराधार निकलता है। कूड़ा उठाने में हुए भ्रष्टाचार का आरोप भी निराधार है। अगर कोई कंपनी नियम व शर्तो को उल्लंघन करेगी तो उसका टेंडर निरस्त होता ही है। अगर टेंडर भरते समय सबसे कम राशि का टेंडर मिला तो यह खुशी की बात है ना कि भ्रष्टाचार की।

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