आज की कड़ी में कुछ ऐसे कोरोना योद्धाओं की बात जो अपने-अपने स्तर पर और अलग-अलग तौर-तरीकों से कोविड मरीजों की सेवा में जुटे हुए हैं। चिकित्सकों के साथ ही अन्या पेशों से जुड़े लोग भी कोरोना काल में लोगों की मदद कर संकट के सिपाही साबित हुए हैं।
दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के चिकित्सकों ने शुरू की निशुल्क व्हाट्सएप सेवा
कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के चलते समाज में फैली नकारात्मकता को दूर करने के लिए हिमाचल और बाहरी राज्यों में रहने वाले प्रदेश के डॉक्टरों ने कोरोना मरीजों को निशुल्क परामर्श देने की पहल की है। दिल्ली और हिमाचल के चिकित्सकों ने इसके लिए व्हाट्सएप सेवा शुरू की है। इसमें कोरोना से जुड़े सवालों और समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। संक्रमितों की मदद के लिए प्लाजमा डोनरों का डाटाबेस भी तैयार किया जा रहा है।
दिल्ली सरकार में कार्यरत आयुर्वेद विशेषज्ञ और शिमला निवासी डॉ. गौरव फुल्ल की ओर से इसको लेकर पहल की गई है। उन्होंने बताया कि अपने कुछ चिकित्सक मित्रों, स्नातकोत्तर छात्रों और अन्य समाजसेवियों के साथ मिलकर एक मुहिम शुरू की है। लोगों की शंकाओं और समस्याओं (चिकित्सा संबंधी) को दूर किया जा रहा है और लोगों को एक-दूसरे की सहायता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पहल में कई आयुर्वेद के विशेषज्ञ चिकित्सक जिनमें से बहुत से हिमाचल में कार्यरत हैं, लोगों को मुफ्त चिकित्सीय परामर्श दे रहे हैं और सावधानियां समझा रहे हैं। कोविड से ठीक हो चुके मरीजों को प्लाजमा दान के लिए जागरूक और प्रोत्साहित किया जा रहा है।
डाटा बेस तैयार कोशिश की जा रही है कि विपदा की घड़ी में मरीजों को आसानी से नजदीकी क्षेत्र में प्लाजमा दाता उपलब्ध करवाया जाए। डॉ. गौरव फुल्ल ने बताया कि समय पर सलाह एवं इलाज उपलब्ध हो जाए तो कोविड के 85 से 90 फीसदी मरीज घरों में ही ठीक हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि शिमला से डॉ. नितिन कश्यप, डॉ. सुमेश कटोच, डॉ. उमा शंकर शर्मा, डॉ. योगेश्वर मेहता, डॉ. वर्तिका कश्यप, हमीरपुर में नादौन से डॉ. पंकज, डॉ. दीक्षा और डॉ. संजीव शर्मा इस मुहिम से जुड़े हुए हैं।
सैंपल जांचते हुए हुईं संक्रमित, स्वस्थ होकर फिर ड्यूटी पर
डॉ नताशा साहनी, विभागाध्यक्ष,माइक्रोबायोलॉजी, जीएमसी कठुआ
महामारी से लड़ने में डॉक्टरों के साथ स्वास्थ्यकर्मियों की टीम जंग के सिपाही की तरह सेवाएं देकर लोगों की जान बचाने में जुटे हैं। इनमें से ही एक जीएमसी कठुआ के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. नताशा साहनी जो बिना थके अपनी जिम्मेदारी को अंजाम दे रही हैं।
उन्होंने बताया कि परिवार में सास-ससुर के अलावा पति व दो बच्चे हैं। एक बच्चे की आयु मात्र 9 माह है। सभी जम्मू में ही रहते हैं। ऐसे में पूरे परिवार को संभालना कई बार मुश्किल भी होता है। लेकिन जिम्मेदारी की याद कभी भी अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होने देती। जीएमसी कठुआ में कई बार आरटीपीसीआर के इतने ज्यादा सैंपल हो जाते हैं कि उनका निपटारा करने में देर भी होती है। लेकिन परिवार के सहयोग के कारण वह लगातार अपनी जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभा पा रही हैं।
गत दिनों वह खुद और परिवार के कुछ सदस्य कोरोना पॉजिटिव हो गए। जिसके कारण उन्हें 15 दिनों तक घर में आइसोलेट होना पड़ा। लेकिन इस दौरान उन्होंने अपने सहकर्मियों के साथ संपर्क बनाए रखा, जिसके कारण कोई भी काम प्रभावित नहीं हुआ है। इसके लिए सहकर्मियों के साथ-साथ जीएमसी कठुआ के प्रशासन का भी आभार जताती हैं।