नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बीच जब ऑक्सीजन और जीवन रक्षक दवाओं की किल्लत हुई तो ठगो को इसमें अवसर मिल गया। मरीजों के परिजन जहां हर कीमत पर ऑक्सीजन, जीवन रक्षक दवाओं व ंअस्पताल में बेड के नाम पर कोई भी रकम चुकाने को तैयार थे। इसका फायदा ठगों ने जमकर उठाया।
सोशल मीडिया के जरिये ठग लोगों के साथ ठगी करने लगे। आरोपी अपने खातों में रुपये ट्रांसफर करवाने के बाद पीड़ितों के नंबरों को ब्लॉक कर देते थे। सैकड़ों लोग इसी तरह ठगी का शिकार हुए। इन सबके बीच दिल्ली पुलिस सख्त हुई और साइबर अपराध करने वाले इन आरोपियों की धरपकड़ शुरू हुई।
पीड़ितों ने हेल्पलाइन नंबर, ईमेल और दूसरे माध्यमों से पुलिस से शिकायत की। इसके बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा, साइबर सेल और जिला पुलिस ने कार्रवाई कर कुल 372 मुकदमे दर्ज कर 91 लोगों को गिरफ्तार किया। यह सारी कार्रवाई कोविड महामारी के दौरान ही हुई। पुलिस के ही प्रयासों का नतीजा है कि साइबर अपराध के ग्राफ में भी तेजी से कमी आई है।
मंगलवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान विशेष आयुक्त नीरज ठाकुर व अन्य पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस की मुहिम जारी है। लोग जहां अपनों की जान बचाने में जुटे हैं, ऐसे समय में अपराधी न सिर्फ लोगों के जज्बातों से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि उनके अपनों के जीवन को भी खतरे में डाल रहे हैं। ऐसे फोन कॉल्स, सोशल मीडिया व दूसरे माध्यमों पर पुलिस की पैनी नजर है।
विशेष आयुक्त ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में पुलिस को अलग-अलग माध्यमों से कुल 910 साइबर ठगी की शिकायतें मिली थीं। इनकी जांच के बाद पुलिस ने फिलहाल 372 एफआईआर दर्ज कर ली हैं। इन मामलों की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की 20 टीमों ने सात राज्यों में छापेमारी कर कुल 91 लोगों को गिरफ्तार किया है।
वहीं पुलिस ने छानबीन के दौरान विभिन्न बैंकों के 214 खातों में 53.60 लाख रुपये फ्रीज करवाए हैं। पुलिस को जालसाजों के 861 नंबरों का पता चला। पुलिस ने इन नंबरों को बंद करवाने के लिए कहा है। दूसरी ओर 168 मोबाइल नंबरों के ट्रू कॉलर पर स्पैम में डालकर ब्लैक लिस्ट करने के लिए कहा गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आम लोग थोड़ी सी सावधानी बरतकर ठगी से बच सकते हैं। ऑक्सीजन व दूसरे जरूरी उपकरण ऑनलाइन या फोन पर खरीदते समय किसी पर एकदम विश्वास न करें। किसी को भी एडवांस पेमेंट न करें। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मैसेज की अपने स्तर पर अच्छी तरह से पड़ताल कर लें। इसके बाद धोखाधड़ी की संभावना कम होगी।