डॉक्टरों का कहना है कि फैटी लिवर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके शुरुआती दौर में कोई साफ लक्षण नजर नहीं आते। समय रहते जांच न होने पर लिवर धीरे-धीरे सख्त हो सकता है और शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में परेशानी होती है। शोध में यह भी पाया गया कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, मोटापे और डायबिटीज से पीड़ित मरीज ज्यादा जोखिम में हैं।
समय पर जांच से बीमारी काबू में आ सकती है
उत्तर और मध्य भारत में पुरुषों और दक्षिण भारत में महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी गई है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि उम्र या वजन बढ़ने पर लिवर की जांच कराएं, मीठा और ज्यादा चर्बी वाला खाना कम करें, हरी सब्जियां और फल खाएं तथा नियमित व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें। सही समय पर सावधानी और जांच से फैटी लिवर की बीमारी को काबू में रखा जा सकता है।