केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के महानिदेशक (डीजी) कुलदीप सिंह ने कहा, घाटी में माहौल ऐसा है कि कश्मीरी पंडित वापस आ सकते हैं। कश्मीर में सीआरपीएफ के कई कैंप और मुख्यालय वैसे घरों और मंदिरों में चल रहे हैं, जिन्हें कश्मीरी पंडित छोड़ कर गए थे। अगर वे घाटी में वापस आते हैं तो उनके घर खाली कर दिए जाएंगे। डीजी के मुताबिक सीआरपीएफ ने जम्मू-कश्मीर में दस जगहों पर 524 कनाल जमीन ली है, जहां कैंप बनाए जाएंगे। अब सुरक्षा बल का कोई भी कैंप वहां के स्कूल परिसर में नहीं लगा है।
डीजी के मुताबिक कश्मीर में माहौल काफी तेजी से सुधर रहा है। सीआरपीएफ जम्मू-कश्मीर के स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कई क्षेत्र में सकारात्मक काम कर रही है। 12 मार्च को सोपियां में आतंकियों के हाथों मारे गए सीआरपीएफ जवान मुख्तार अहमद के सवाल पर डीजी ने कहा, सीआरपीएफ के साथ ऐसी घटना पहली बार हुई।
आतंकी तंत्र घाटी में आने जाने वालों पर नजर रखते हैं। मुख्तार अहमद छुट्टी पर थे। फोर्स ने इस घटना के बाद ही कातिल को कम से कम समय में पकड़ लिया। आतंकियों के धार्मिक स्थानों पर पनाह लेने से संबंधित सवाल पर कुलदीप सिंह ने कहा, आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। वह जहां भी छुपेंगे सुरक्षा एजेंसियों उन्हें ढूढेंगी और मार गिराएंगी।
सालभर में 175 आतंकी ढेर किए
डीजी ने कुलदीप सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में निश्चित रूप से समय-समय पर उछाल आया है, लेकिन सुरक्षा बलों ने इसे तुरंत रोक लिया है। दिसंबर और जनवरी के महीने सुरक्षा बलों के लिए बहुत अच्छे रहे हैं और उनकी सफलता दर ज्यादा रही है और कई बार आतंकवादी हिंसा में तेजी देखी जाती है। डीजी ने बताया कि पिछले एक साल में घाटी में 175 आतंकियों को मार गिराया गया है। जबकि 183 गिरफ्तार किए गए। इसी तरह 1500 माओवादियों और उग्रवादियों को भी गिरफ्तार किया गया। जबकि 750 को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर किया गया। पिछले एक साल में उनके 12 जवानों ने ड्यूटी पर अपने प्राण न्यौछावर किए, जबकि 169 मामूली या गंभीर रूप से घायल हुए।