राजधानी में कोरोना से हालत तेजी से सुधर रहे हैं। दैनिक संक्रमितों की संख्या घट रही है। साथ ही संक्रमण दर में भी कमी आ रही है, लेकिन मौत के मामले कम नहीं हो रहे हैं। संक्रमितों के मुकाबले अधिक लोगों को मौतें होने से मृत्युदर में भी इजाफा हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के गंभीर मरीज कम नहीं हो रहे हैं। ऐसे में मौत के मामलों में कमी आने में समय लग सकता है।
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दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह से कोरोना के मामले बढ़ने लगे थे। इसके बाद हर दिन दैनिक संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ रहा था और 20 अप्रैल को चौथी लहर का पीक आया था। तब एक दिन में ही कोरोना के 28,395 मामले आए थे। इसके बाद अप्रैल के आखिरी सप्ताह तक हालातों में कोई सुधार नहीं हुआ था, लेकिन एक मई से स्थिति बदलने लगी। एक मई को दैनिक संक्रमितों की जो संख्या 25,219 थी, वह 16 मई को घटकर 6,456 रह गई, लेकिन इस दौरान मौत के मामलों में कोई खास कमी नहीं आई।
अप्रैल में प्रतिदिन औसतन 18 हजार मामले आने पर 186 लोगों की मौत हो रही थी तो वहीं अब मई में प्रतिदिन सात हजार मामले आने पर भी 178 लोगों की मौत हो रही है। इस लिहाज से देखें तो संक्रमितों की संख्या आधे से भी कम हो गई है, लेकिन मौत के मामलों में कमी नहीं आ रही है। मौत के मामलों में कमी न आने के कारणों पर एम्स के डॉक्टर विक्रम का कहना है कि अभी भी दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में करीब छह हजार संक्रमित मरीज आईसीयू में भर्ती हैं। इनमें से कई रोगियों की हालत गंभीर है। साथ ही कई मरीज गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं और एक से दो दिन में ही उनकी मौत हो रही है। डॉक्टर के मुताबिक अब नए मरीजों की संख्या कम हो रही है। ऐसे में आने वाले एक से दो सप्ताह में मौत के मामले भी कम होने लगेंगे।