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गुड़िया से दरिंदगी मामले में कोर्ट 18 को सुनाएगी फैसला

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नई दिल्ली। 2013 में गांधी नगर में पांच वर्षीय मासूम बच्ची गुड़िया के अपहरण व सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालती फैसला बुधवार को 18 जनवरी तक टल गया। यह मामला निर्भया केस के बाद पूरी दिल्ली व देशभर में लोगों के रोष का कारण बना था।
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कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेश कुमार मल्होत्रा के समक्ष मामले के दोनों आरोपियों मनोज शाह और प्रदीप कुमार को पेश किया गया। मामले का फैसला सुनने के लिये पूरा कोर्ट रूम लोगों से खचाखच भरा हुआ था। दोनों आरोपियों के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं दिखा। न्यायाधीश को दो बजे केस का फैसला सुनाया था लेकिन एक घंटे का समय दिया गया लेकिन उसके बाद कोर्ट ने फैसला सुनाने के लिये 18 जनवरी की तारीख तय कर दी। इस मामले में कुल 15 लोगों की गवाही हुई है।
अदालत के समक्ष पीड़िता के वकील वीरेंद्र वर्मा ने कहा कि दिसंबर 2012 में हुए निर्भया दुष्कर्म के कुछ महीने बाद ही गांधी नगर में पांच वर्षीय बच्ची से वैसी ही दरिंदगी हुई थी। उन्होंने कहा कि पीड़िता ने बहुत दर्द सहा है। उन्होंने उम्मीद जताई की कोर्ट दोनों दोषियों को सख्त से सख्त सजा सुनाएगा।
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उल्लेखनीय है कि 15 अप्रैल 2013 की शाम को गुड़िया के बाहर गली में खेल रही थी। उसी वक्त आरोपी मनोज शाह वहां पहुंचा और उसे बहला फुसलाकर अपने कमरे में ले गया। यहां बच्ची को बंधक बनाकर उसने व उसके दोस्त प्रदीप ने दुष्कर्म किया। इस बीच बच्ची को दो दिन तक बंधक बनाकर रखा गया और कई बार सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इसके साथ ही आरोपियों ने बच्ची के गुप्तांग में बोतल, मोमबत्ती और कई चीजें डाल दी थीं। इसके बाद दोनों आरोपी पीड़ित बच्ची को कमरे में बंद करके बाहर से ताला लगाकर फरार हो गए थे। दो दिन तक पीड़िता के परिवार ने उसे तलाशा, लेकिन कोई सुराग ना मिलने पर मामले की सूचना पुलिस को दी गई थी।
जब परिवार बच्ची को तलाश रहा था कि तभी पीड़ित बच्ची ने हिम्मत करके अंदर से गेट बजाया तो एक पड़ोसी ने खटखटाने की आवाज सुनी, शक होने पर वह पीड़ित परिवार को बुलाया और कमरे का दरवाजा तोड़ा तो गुड़िया खून से लथपथ हालत में वहां मिली। इसके बाद बच्ची को एम्स में भर्ती करवाया गया, जहां उसकी पांच सर्जरी हुईं। करीब एक साल लग गया पीड़िता को सही होने में। इस घटना के कुछ दिन बाद ही पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इस घटना के विरोध में दिल्ली में कई विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।
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