नई दिल्ली। कोर्ट ने तब्लीगी जमात मामले में पांच देशों के नागरिकों को जुर्माना लगाने के बाद रिहा कर दिया। इन जमातियों ने उनके खिलाफ लगे आरोपों के तहत सजा कम करने के लिए समझौता याचिका दायर की थी और अपने अपराध को स्वीकार किया। इस आधार पर अदालत ने इन्हें राहत प्रदान की है।
साकेत कोर्ट के महानगर दंडाधिकारी देव चौधरी ने जिबूती, माली, केन्या और श्रीलंका के 17 नागरिकों को 5-5 हजार रुपये जुर्माना भरने के बाद रिहा करने का आदेश दिया। इन आरोपियों की ओर से वकील आशिमा मंडला ने पैरवी की। इन आरोपियों को इनके ठहरने की जगह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इनके उच्चायोगों के अधिकारियों और मामले के आईओ ने कोर्ट में पेश किया।
वहीं साकेत कोर्ट के महानगर दंडाधिकारी आकाश ने म्यांमार के नागरिकों को 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाने के बाद रिहा कर दिया। इन सभी नागरिकों के खिलाफ पुलिस ने आरोपपत्र दायर किए थे और इनके खिलाफ कोविड-19 महामारी, वीजा नियमों और सरकारी दिशा निर्देशों के उल्लंघन के लिए आरोपी ठहराया था। इन सभी विदेशी नागरिकों ने समझौता याचिका दायर करके रिहाई की गुहार लगाई थी।
इन आरोपियों को इससे पहले अदालत ने 10-10 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत प्रदान की थी। इन विदेशी नागरिकों के खिलाफ शिकायत करते वाले डिफेंस कालोनी के एसडीएम, लाजपत नगर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और निजामुद्दीन थाने के इंस्पेक्टर ने इन विदेशी नागरिकों की याचिकाओं पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद कोर्ट ने इन्हीं रिहाई का फैसला सुनाया।